100 दिन पूरे, कब तक चलेगा युद्ध

रूस और यूक्रेन की सेना के बीच भयंकर संघर्ष

100 दिन पूरे, कब तक चलेगा युद्ध
यूक्रेन के राष्टपति जेलेंस्की ने दावा किया है कि रूस का यूक्रेन के 20 प्रतिशत हिस्से पर नियंत्रण है। यह रूस और यूक्रेन युद्ध की सही स्थिति को बताने के लिए काफी है। रूस का डोनबास के 95 फीसदी हिस्से पर नियंत्रण माना जा रहा है, इसमें मारियूपोल भी शामिल है।

यूक्रेन और रूस युद्ध के 100 दिन पूरे हो गए हैं। इसी बीच यूक्रेन के राष्टपति जेलेंस्की ने दावा किया है कि रूस का यूक्रेन के 20 प्रतिशत हिस्से पर नियंत्रण है। यह रूस और यूक्रेन युद्ध की सही स्थिति को बताने के लिए काफी है। रूस का डोनबास के 95 फीसदी हिस्से पर नियंत्रण माना जा रहा है, इसमें मारियूपोल भी शामिल है। वहीं सेवेरोदोनेत्स्क में रूस और यूक्रेन की सेना के बीच भयंकर संघर्ष चल रहा है। उधर पिछले दिनों फिनलैंड और स्वीडन की जल्द से जल्द नाटो सदस्यता के लिए आवेदन करने की घोषणा इस बात का सबूत हैं कि यूक्रेन युद्ध ने यूरोपीय देशों की मनोदशा को बहुत गहरे प्रभावित किया है। हालांकि तुर्की ने नाटो में स्वीडन और फिनलैंड को शामिल किए जाने पर आपत्ति जताई है और कहा कि दोनों देशों को संगठन में शामिल करना तुर्की की सुरक्षा को खतरे में डालेगा। रूस के पड़ोस में स्थित इन दोनों देशों ने शीत युद्ध के लंबे चले दौर में भी अपनी तटस्थता बनाए रखी थी। वजह यह भी हो सकती है कि वे पड़ोस की महाशक्ति को नाराज नहीं करना चाहते थे। मगर बदले हालात में अब ऐसा लगता है कि सुरक्षा की चिंता रूस की संभावित नाराजगी पर भारी पड़ गई है। खासकर फिनलैंड की तो 1300 किलोमीटर लंबी सीमा रूस के साथ लगती है। वहां सरकार पर जनमत का भी जबर्दस्त दबाव है। नाटो के सेक्रेटरी जनरल भी कह चुके हैं कि इन दोनों के आवेदन पर जल्द ही पॉजिटिव फैसला लिया जाएगा। अमेरिका भी इसके पक्ष में है। ऐसे में तय माना जा रहा है कि जल्द ही ये दोनों देश नाटो के सदस्य बन जाएंगे। यह रूस के प्रभाव क्षेत्र में नाटो के विस्तार का अगला चरण है, जिसे रूस हर कीमत पर रोकने की बात करता रहा है। यूक्रेन पर हमले के पीछे भी उसकी यही आशंका रही है कि नाटो उसके पड़ोस के देशों तक पहुंचना चाहता है।

उत्तरी यूरोप की सुरक्षा को गंभीर नुकसान पहुंच सकता हैं

यूक्रेन तो अभी तक नाटो का मेंबर नहीं बना है, लेकिन फिनलैंड के इसका सदस्य बनते ही रूस से लगती नाटो की सीमा दोगुने से भी ज्यादा हो जाएगी। इस पर रूस ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी। उसने कहा था कि अगर इन दोनों देशों ने नाटो की सदस्यता ली तो वह जवाबी कदम उठाने को मजबूर होगा। उसने संकेत दिए थे कि ये कदम न केवल द्विपक्षीय संबंधों को, बल्कि उत्तरी यूरोप की सुरक्षा और स्थिरता को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं।यूक्रेन के साथ युद्ध के दौरान भी रूसी नेतृत्व एकाधिक बार परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की परोक्ष धमकी दे चुका है, लेकिन पारंपरिक हथियारों पर आधारित लड़ाई में उसे उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिली है। अव्वल तो युद्ध अपेक्षा से कहीं ज्यादा लंबा खिंच गया है, दूसरे अभी भी यूक्रेन समर्पण करने के मूड में नहीं दिखता। यह भी साफ हो गया है कि जिस नाटो विस्तार को मुद्दा बनाकर व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन के खिलाफ युद्ध छेड़ा, वह उसे रोकने में नाकाम हो रहे हैं।

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