गेहूं निर्यात पर रोक

हालांकि विदेश व्यापार महानिदेशालय ने अधिसूचना जारी करके स्पष्ट किया है कि सरकार किसी दूसरे देश की खास जरूरत के मद्देनजर गेहूं निर्यात की अनुमति दे सकती है।

गेहूं निर्यात पर रोक

भारत ने घरेलू स्तर पर बढ़ती कीमतों को नियंत्रण करने के उपाय के तहत गेहूं के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।

भारत ने घरेलू स्तर पर बढ़ती कीमतों को नियंत्रण करने के उपाय के तहत गेहूं के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। हालांकि विदेश व्यापार महानिदेशालय ने अधिसूचना जारी करके स्पष्ट किया है कि सरकार किसी दूसरे देश की खास जरूरत के मद्देनजर गेहूं निर्यात की अनुमति दे सकती है। वह गेहूं भी निर्यात किया जा सकेगा, जिसके लिए लेटर ऑफ क्रेडिट जारी किए जा चुके हैं और जो शिपमेंट के लिए तैयार है। देश में पिछले कुछ दिनों से गेहूं की कीमतें ऊंची हो चली है और आटा भी काफी महंगा बिक रहा है। बढ़ती महंगाई के चलते गेहूं के बढ़ते मूल्यों को नियंत्रित करना जनहित में ही है। निर्यात रोकने का असर भी देखने को मिला है। कुछ अनाज मण्डियों में गेहूं के दाम गिरे भी हैं। गेहूं की कीमतें बढ़ने के पीछे के दो मुख्य कारण बताए जा रहे हैं। पहला इस बार मार्च-अप्रैल में ही बढ़ती गर्मी व लू के कारण देश में गेहूं की फसल का काफी नुकसान हुआ है। अनुमान था कि देश में 11.13 करोड़ टन गेहूं का उत्पादन होगा, लेकिन फसलें नष्ट होने की वजह से यह अनुमान लगाया गया कि उत्पादन 10.50 करोड़ टन तक रह सकता है। गौरतलब है कि देश में गेहूं की सालाना मांग 10 करोड़ टन के आसपास रहती है। इसलिए गेहूं का पर्याप्त स्टाक रखने के लिए निर्यात पर रोक का कदम उठाया गया है। दूसरा कारण, रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते गेहूं की वैश्विक मांग बढ़ी है और भारत पिछले चार महीनों में 9.63 लाख टन का निर्यात कर चुका है। रूस और यूक्रेन विश्व में प्रमुख निर्यातक देश हैं, लेकिन युद्ध की वजह से गेहूं की मांग पूरी नहीं हो पा रही है। भारत विश्व का दूसरा गेहूं उत्पादक देश है, तो दुनिया को भारत से बहुत उम्मीदें थीं और भारत ने निर्यात पर रोक लगाकर कई देशों को निराश कर दिया है। इस बार सरकार की खरीद 50 फीसदी से भी कम है, बाजारों को पिछले साल की तुलना में कम आपूर्ति है। हालांकि सरकार ने गेहूं खरीद को बढ़ाने के लिए समय की अवधि को अब 31 मई तक बढ़ा दिया है, लेकिन लक्ष्य पूरा होने की संभावना कम ही है, क्योंकि व्यापारियों से पहले ही किसानों से सीधे गेहूं की खरीद करती है। निर्यात पर रोक के फैसले से भारत के घरेलू उपभोक्ता को कितना लाभ मिलता है, जो देखना होगा, लेकिन दुनिया के कई देशों ने भारत के अचानक फैसले की निंदा की है। इससे भारत की विश्वसनीयता की क्षति हो सकती है। भारत ने निर्यात पर रोक लगाने से पहले निर्यात को बढ़ाने की बात कही थी, जिससे दुनिया गेहूं आपूर्ति को लेकर आश्वस्त थी।

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