जानें राज काज में क्या है खास

रंग बदला, पर शांति नहीं 

जानें राज काज में क्या है खास

सूबे में भगवा वाले भाई लोगों की नजरें एक बार फिर दिल्ली की तरफ टिकी हुई हैं।

अब नजरें दिल्ली की तरफ :

सूबे में भगवा वाले भाई लोगों की नजरें एक बार फिर दिल्ली की तरफ टिकी हुई हैं। नजरें टिकने का कारण भी छोटा-मोटा नहीं, बल्कि न्यू नेशनल प्रेसीडेंट है, जो जल्द मिलने वाला है। इसके लिए दौड़ में पहले कइयों के नाम आए, मगर सब ठण्डे बस्ते में चले गए। अब जो नया नाम आया है, उसको लेकर मरु प्रदेश के भाई लोग काफी उत्साहित हैं। बीकाणा वालों के तो पैर जमीं पर भी नहीं टिक रहे। सरदार पटेल मार्ग स्थित बंगला नंबर 51 में बने भगवा वालों के ठिकाने पर चर्चा है कि अगर गुजराती बंधुओं की जोड़ी ने अपनी चलाई, तो मेष राशि वाले भाई साहब की लॉटरी लग सकती है, जिनकी आड़ में गले की फांस बने बाबा साहेब वाले मसले को ठण्डा करने में कोई जोर नहीं लगाना पडेÞगा। चूंकि भाई साहब को साइकिल से लेकर कलेक्टरी चलाने तक का अनुभव है।

रंग बदला, पर शांति नहीं :

सूबे की सबसे बड़ी पंचायत के सरपंच साहब ने शांति के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी। बडी उम्मीदों के साथ पंचायत का रंग तक बदलवाया था, पर मामला उलटा हो गया। और तो और जिन अपनों से ज्यादा उम्मीदें थी, वो ही विपक्ष का रोल निभाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे और वो ही उछलकूद करने में आगे हैं। आसन के बांईं तरफ बैठने वाले भाई लोग भी अपना काम होते देख मुंह बंद कर चटकारे ले रहे हैं। अब भाई साहब को कौन समझाए कि दिल्ली वालों की नजरों में आने के लिए कई पापड़ बेलने पडते हैं, जिसमें बात बात पर उछलना भी शामिल है। नहीं मानो तो आजमा कर देख लो, आसन की रूलिंग से सबसे पहले पेट में  दर्द उन्हीं लोगों के होता है।

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सिर्फ गजक का सहारा :

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समय किसी का एक सा नहीं होता, कब बदल जाए, पता ही नहीं चलता। नेताओं के साथ ही ब्यूरोक्रेट्स का भी समय बदले बिना नहीं रहता। राज से पटरी बैठ जाए, तो रोजाना मिठाई खाए बिना पार नहीं पडती और नहीं बैठे तो फिर उपर वाला ही मालिक है। अब देखो ना, इन दिनों एक मोहतरमा की राज से पटरी नहीं बैठी, तो उनको सचिवालय से बाहर कर दिया। उनसे ज्यादा पॉवर भी सैकण्ड लेवल वाले साहब के पास है। अब मैडम आने वाले को गजक खिलाकर टाइम पास करने में ही अपनी भलाई समझती है। मैडम के भी समझ में आ गया कि समय बडा बलवान है, समय-समय की बात कोई समय दिन बडा और कोई समय रात।

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एक जुमला यह भी :

सूबे इन दिनों एक जुमला जोरों पर है। जुमले से कई भाई लोगों का हाजमा तक बिगड़ा हुआ है। जुमला भी छोटा-मोटा नहीं बल्कि रिसफलिंग को लेकर है। सरदार पटेल मार्ग स्थित बंगला नंबर 51 में बने भगवा वालों के ठिकाने के साथ इंदिरा गांधी भवन में बने पीसीसी के आॅफिस में भी जुमले की चर्चा हुए बिना नहीं रहती। जुमला है कि रिसफलिंग से पहले रिव्यू तो होगा, लेकिन एक नंबर का नहीं बल्कि दो से 24 नंबर तक होगा। चूंकि दिल्ली वालों का आईबी तंत्र इतना मजबूत है कि फोर्थ परसन को पता लगने पहले बात वहां तक पहुंचे बिना नहीं रहती। 

एल. एल. शर्मा
(ये लेखक के अपने विचार हैं)

 

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