जानें राज काज में क्या है खास 

स्टूडेंट्स का बिगड़ा जायका 

जानें राज काज में क्या है खास 

जब से खींवसर वाले रेवत राम जी भाई साहब लपेटे में आए हैं, तब से सूबे में पेट वाले और गोद वाले पूतों की चर्चा कुछ ज्यादा ही है।

चर्चा में पेट और गोद वाले पूत :

जब से खींवसर वाले रेवत राम जी भाई साहब लपेटे में आए हैं, तब से सूबे में पेट वाले और गोद वाले पूतों की चर्चा कुछ ज्यादा ही है। चर्चा भी छोटी-मोटी जगह पर नहीं बल्कि सरदार पटेल मार्ग पर स्थित बंगला नंबर 51 में बने भगवा वालों के ठिकाने पर है। चर्चा भी और कोई नहीं बल्कि हार्ड कोर वर्कर कर रहे हैं। चर्चा है कि बडेÞ लीडर्स ने आनन-फानन में पेट वाले को छोड़ कर आरएलपी से गोद लेकर भाई साहब पर कुछ ज्यादा ही भरोसा जताया था। रिजल्ट के बाद भाई साहब के साथ जोरदार ठुमके लगाने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी थी। और तो और पेट वाले हार्ड कोर वर्कर्स को तो कोसों दूर रखा गया था। अब लीडर्स को कौन समझाए कि पेट वालों को छोड़ गोद वालों से आस करना बुद्धिमानी नहीं बल्कि बेवकूफी मानी जाती है, लेकिन अब पछतावत होत क्या, जब चिड़िया चुग गई खेत।  

आस नेता बनने की :

सूबे में पंचायतों के चुनाव तो पता नहीं कब होंगे, मगर नए नेता बनने वालों की भीड़ अभी से उमड़ने लगी है। भीड़ और कहीं नहीं, केवल मंत्रियों और एमएलएज के दफ्तरों और घरों के द्वार पर मालाओं के साथ जाती है। वैसे तो अभी कई नेताओं की पूछ नहीं है, लेकिन नए बनने वाले नेताओं ने उनकी थोड़ी बहुत चलाना चालू कर दिया। राज का काज करने वालों में भी खुसरफुसर है कि बेचारे ठाले बैठे ओल्ड लीडर्स का न्यू लीडर्स ने चौघड़िया बदला, तो अभी से इसका सोशल मीडिया पर इम्पैक्ट दिखने लगा है। भला हो न्यू लीडर्स का, जिन्होंने छुटभैया नेताओं के चेहरे की रौनक तो बढ़ा दी, वरना घर में घुसते और निकलते वक्त मायूस चेहरे के सिवाय कुछ भी नहीं दिखता था।

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स्टूडेंट्स का बिगड़ा जायका :

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सूबे में पिछले कुछ सालों से स्टूडेंट्स का जायका बिगड़ा हुआ है। जायका और किसी वजह से नहीं बल्कि सेमेस्टर सिस्टम की वजह से बिगड़ा है। इससे प्राईवेट यूनिवर्सिटीज के पौ बारह हो रहे हैं। आजादी के साल बने शिक्षा के सबसे बडेÞ मंदिर में सेमेस्टर सिस्टम ने डिग्री का टाइम बढ़ा दिया है। साल बिगड़ने के डर से स्टूडेंट्स का रुझान भी प्राईवेट की तरफ ज्यादा है। राज का काज करने वालों में चर्चा है कि इन दिनों यूनिवर्सिटीज की हालत  बीएसएनएल जैसी हो गई, तभी तो सूबे में प्राईवेट यूनिवर्सिटीज की संख्या बढ़ कर 52 तक पहुंच गई। अब इस राज को समझने वाले समझ गए, ना समझे वो अनाड़ी है।  

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एक जुमला यह भी :

सूबे में इन दिनों एक जुमला जोरों पर है। जुमला भी छोटा-मोटा नहीं, बल्कि डांस इन पॉलिटिक्स को लेकर है। जुमला है कि सूबे में लीडर्स को जब भी मौका मिलता है, डांस किए बिना नहीं रहते। डांस भी किसके साथ कर रहे हैं, सब भूल जाते हैं और वे न आगा सोचते है और नहीं पीछा। मीनेश वंशज डॉक्टर साहब का डांस तो सालों से जग जाहिर है, कई बार पीली लूगड़ियों के बीच ठुमके लगाते देखे गए हैं। लक्ष्मणगढ़ वाले गोविन्दजी का गमछे के साथ वाला डांस तो दर्जनों मंचों पर दिखाई दिया है। अब अलवर भाई साहब को डांस का शौक लगा है, सो वो भी ठुमके लगा रहे हैं।

-एल. एल. शर्मा 
(यह लेखक के अपने विचार हैं।)

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