अमेरिकी सीनेट ने जे क्लेटन की नियुक्ति को मंजूरी दी
51 के मुकाबले 47 मतों से मंजूरी
अमेरिका को नया स्थायी खुफिया प्रमुख मिल गया है। अमेरिकी सीनेट ने जे क्लेटन की नियुक्ति को मंजूरी दी, लेकिन 2020 के राष्ट्रपति चुनाव पर उनके रुख को लेकर डेमोक्रेट सांसदों ने विरोध किया। इस पूरी नियुक्ति के केंद्र में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चुनाव संबंधी दावे और उन पर छिड़ा राजनीतिक विवाद है। अमेरिकी सीनेट ने जे. क्लेटन को देश खुफिया प्रमुख बनने की मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही कई हफ्तों की देरी के बाद इस पद पर स्थायी निदेशक की नियुक्ति हो गई है। इससे पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उनकी नियुक्ति की प्रक्रिया को कुछ समय के लिए टाल दिया था। क्लेटन इस समय न्यूयॉर्क के दक्षिणी जिले के अमेरिकी अटॉर्नी हैं। वह पहले प्रतिभूति और विनिमय आयोग के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। सीनेट ने उन्हें 51 के मुकाबले 47 मतों से मंजूरी दी।
सभी रिपब्लिकन सांसदों ने उनके पक्ष में और सभी डेमोक्रेट सांसदों ने उनके विरोध में मतदान किया। रिपब्लिकन नेता जून में ही उनकी नियुक्ति चाहते थे, लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप ने सुनवाई टाल दी थी, ताकि इस पद के लिए उनकी अस्थायी पसंद बिल पुल्टे कुछ हफ्तों तक जिम्मेदारी संभाल सकें। इससे पहले निदेशक तुलसी गबार्ड ने इस्तीफा दे दिया था। दोनों दलों के कई सांसदों ने बिल पुल्टे को लेकर चिंता जताई थी। पुल्टे पहले आवास क्षेत्र के नियामक रह चुके हैं। लेकिन उन्हें खुफिया मामलों का कोई अनुभव नहीं था। इसी दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने इस महीने व्हाइट हाउस से भाषण दिया, जिसमें उन्होंने वर्ष 2020 के राष्ट्रपति चुनाव को लेकर अपने पहले वाले दावों को फिर दोहराया। ट्रंप यह चुनाव हार गए थे। लेकिन उन्होंने अपने दावों के समर्थन में कुछ गोपनीय दस्तावेज भी जारी किए।
बिल पुल्टे ने यह भी कहा कि उन्होंने राष्ट्रीय खुफिया कार्यालय में कर्मचारियों की संख्या कम कराई है। यह कार्यालय अमेरिका की सभी खुफिया एजेंसियों के बीच तालमेल का काम करता है। पुल्टे ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि हाल की छंटनी के बाद कार्यालय में कुछ सप्ताह पहले की तुलना में करीब 30 फीसदी कर्मचारियों की कमी हो गई है। हालांकि, उन्होंने इन कटौतियों का कोई विवरण नहीं दिया, इसलिए इस दावे की तुरंत पुष्टि नहीं हो सकी। वर्जीनिया से डेमोक्रेट सीनेटर मार्क वॉर्नर ने सुनवाई के अंत में कहा कि वह जे क्लेटन से बहुत निराश हैं। वॉर्नर सीनेट की खुफिया समिति में अपने दल के सबसे वरिष्ठ सदस्य हैं।
उन्होंने शुरुआत में उनकी नियुक्ति की सराहना की थी। मार्क वॉर्नर ने कहा कि वह क्लेटन की नियुक्ति का विरोध करेंगे। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि बिल पुल्टे के इस पद पर बने रहने की स्थिति में डेमोक्रेट एक कठिन परिस्थिति में हैं। जे. क्लेटन का डेमोक्रेट सांसदों की ओर से विरोध ऐसे समय हो रहा है, जब राष्ट्रपति ट्रंप वर्ष 2020 के चुनाव को फिर से प्रमुख मुद्दा बना रहे हैं। ट्रंप बार-बार उस चुनाव पर सवाल उठाते रहे हैं और जो बाइडन की जीत से जुड़े उन दावों को बढ़ावा दे रहे हैं, जिन्हें पहले ही गलत साबित किया जा चुका है। सुनवाई के दौरान क्लेटन ने कई बार कहा कि चुनाव के नतीजों को आधिकारिक रूप से प्रमाणित किया गया था। लेकिन उन्होंने साफ शब्दों में यह नहीं कहा कि चुनाव जो बाइडन ने जीता था। सीनेट में डेमोक्रेट दल के नेता चक शूमर ने कहा कि क्लेटन का प्रदर्शन बहुत खराब था। उन्होंने कहा कि इसके कारण डेमोक्रेट सांसदों का समर्थन मिलने की संभावना और कम हो गई। सीनेट में मतदान से कुछ घंटे पहले बिल पुल्टे ने वर्ष 2020 से जुड़े खुफिया समुदाय के कुछ दस्तावेज जारी किए। इनमें बताया गया था कि चीन के पास अमेरिका की राजनीतिक प्रक्रिया में दखल देने की क्षमता है और चुनाव व्यवस्था में कुछ कमजोरियां मौजूद हैं।
क्लेटन ने कहा- मैंने स्वयं देखा है कि मजबूत राष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था के लिए स्पष्ट निर्णय, अनुशासन, ईमानदारी, प्रभावी संवाद और सरकार की अलग-अलग शाखाओं के बीच अच्छा सहयोग कितना जरूरी होता है। यदि मुझे राष्ट्रीय खुफिया निदेशक बनाया जाता है, तो मैं हर दिन इन सिद्धांतों का पालन करने का वचन देता हूं। उन्होंने सांसदों से यह भी कहा कि वर्ष 2020 के चुनाव पर राष्ट्रपति ट्रंप के भाषण से उनका कोई संबंध नहीं था।

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