युवा पीढ़ी राष्ट्र की समृद्धि का आधार

विकसित भारत 

युवा पीढ़ी राष्ट्र की समृद्धि का आधार

किसी भी देश के निर्माण, सामाजिक-आर्थिक विकास की प्रक्रिया में, युवाओं-युवा पीढ़ी का हमेशा से ही महत्वपूर्ण स्थान रहा है।

किसी भी देश के निर्माण, सामाजिक-आर्थिक विकास की प्रक्रिया में, युवाओं-युवा पीढ़ी का हमेशा से ही महत्वपूर्ण स्थान रहा है। युवा पीढ़ी को राष्ट्र की समृद्धि का आधार माना जाता है। भारत अपनी आजादी का अमृत काल मना रहा है, आजादी के लिए अपना बलिदान देने वाले क्रांतिकारियों और आजादी को अक्षुण्य बनाए रखने के लिए संघर्षरत रहे लोगों के बारे में युवा पीढ़ी को बताने व जागरूक करने के उद्देश्य से सामूहिक भागीदारी वाले कई नवाचार और पहल की गई हैं। इन नवाचारों को जनता का भरपूर समर्थन और भागीदारी मिली है। इन पहलों में भौतिक उन्नति के साथ नैतिक गहनता और सांस्कृतिक जीवंतता बनाए रखना सुनिश्चित किया गया है। इन नवाचारों में ऐतिहासिक घटनाओं को पुनर्जीवित करना भी शामिल है। बताते चलें कि अमृत काल शब्द भारत की आजादी के 75वें वर्ष से शुरू होकर अगले 25 वर्षों तक की अवधि को दर्शाता है, जिसमें भारत को एक सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने का लक्ष्य है।

वंदे मातरम के 150 वर्ष :

राष्ट्रीय गौरव, साहस और बलिदान के शाश्वत मूल्यों को लिए वंदेमातरम,जिसका प्रभाव भारत की सीमाओं से परे भी फैला,की 150वीं वर्षगांठ पर देश-विदेश में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। संविधान को अंगीकृत करने की 75वीं वर्षगांठ पर एक वर्ष तक चलने वाले कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने 7 नवम्बर को नई दिल्ली में वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में एक वर्ष तक चलने वाले स्मरणोत्सव का उद्घाटन किया। उन्होंने वंदे मातरम के सामूहिक गान की प्रशंसा करते हुए कहा कि इसके सुखद अहसास को शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता। यह वर्तमान को आत्मविश्वास से भर देता है और भविष्य में एक नए साहस का संचार करता है, जिससे यह विश्वास पैदा होता है कि किसी भी संकल्प और लक्ष्य पूरा किया जा सकता है। उल्लेखनीय है कि 1875 में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने वंदे मातरम गीत की रचना की थी।

भारत की आत्मा :

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वंदेमातरम का अर्थ है, हे मां, मैं तुझे प्रणाम करता हूं। यहां मां से अभिप्राय भारत माता से है। गीत में भारत की धरती, नदियों, पर्वत, उर्वरता, समृद्धि का भावपूर्ण और दिव्यरूप से वर्णन किया गया है। यह गीत मात्र शब्दों का संग्रह ही नहीं है, भारत की आत्मा और देशभक्ति का अनुपम प्रतीक बना हुआ है। वंदे मातरम पहली बार साहित्यिक पत्रिका बंगदर्शन में 7 नवंबर 1875 को प्रकाशित हुआ था। बाद में, बंकिम चंद्र ने इसे अपने अमर उपन्यास आनंदमठ में शामिल किया, जो 1882 में प्रकाशित हुआ। रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे संगीतबद्ध किया था और 1896 में कांग्रेस के अधिवेशन में इसे गाया था। 1907 में, मैडम भीकाजी कामा ने पहली बार भारत के बाहर स्टटगार्ट, बर्लिन में तिरंगा झंडा फहराया था। उस झंडे पर वंदे मातरम लिखा हुआ था। संविधान को अपनाने की 75वीं वर्षगांठ पर साल भर चलने वाले समारोह का विषय हमारा संविधान, हमारा स्वाभिमान है, जिसका उद्देश्य संविधान में निहित मूल मूल्यों को दोहराना और नागरिकों को इसके आदर्शों को बनाए रखने के लिए प्रेरित करना है।

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विकसित भारत :

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हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने पर, वर्ष 2047 तक,देश के सामने एक विकसित भारत का लक्ष्य रखा है। इस दृष्टिकोण का उद्देश्य अपनी समृद्ध विरासत का लाभ उठाकर, परंपरा में निहित नवाचार को बढ़ावा देकर और सांस्कृतिक कूटनीति के माध्यम से वैश्विक प्रभाव को बढ़ाकर सांस्कृतिक रूप से गौरवशाली भारत का निर्माण करना है। आर्थिक और सामाजिक विकास की दिशा में इसे प्रमुख स्तंभ के रूप में माना जा रहा है। भारत के उत्तर और दक्षिण के संबंधों को मजबूत करने के लिए वाराणसी में काशी तमिल संगमम के चौथे संस्करण की शुरुआत होने जा रही है। स्वामी दयानन्द सरस्वती द्वारा 1875 में स्थापित आर्यसमाज, जो सुधार आंदोलन में मील का पत्थर बनाए की 150वीं वर्षगांठ पर नई दिल्ली में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय आर्य महासम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का शामिल होना उनके सार्वभौमिक उत्थान के उद्देश्य को दर्शाते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने इसी वर्ष स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती को जीवन में बदलाव लाने वाले कार्यक्रमों के साथ मनाए जाने की घोषणा की है।

पटेल की 150वीं जयन्ती :

अभी 31 अक्टूबर को ही भारत के भौगोलिक और राजनीतिक एकीकरण में योगदान देने वाले लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की 150वीं जयन्ती मनाई गई। सरकार ने 2014 में उनकी जयन्ती को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया था। पीएम ने सरदार पटेल की 150वीं जयंती पर गुजरात के एकता नगर में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पर राष्ट्रीय एकता दिवस परेड को संबोधित किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी समारोह में हिस्सा लेकर व्यक्ति निर्माण की सुंदर प्रक्रिया को भी सराहा है और संघ की 100 वर्षों की यात्रा को त्याग, नि:स्वार्थ सेवा और राष्ट्र निर्माण की अद्भुत मिसाल बताया। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार विकसित भारत / 2047 की संकल्पना को साकार करने में जुटी है जहां पूरे समाज में वसुधैव कुटुंबकम के भाव को विकसित करना है। हम भाग्यशाली हैं कि देश में हमारी सांस्कृतिक परंपराओं और सभ्यतागत मूल्यों पर गर्व का पुनरुत्थान हो रहा है।

-प्रकाश श्रीवास्तव
यह लेखक के अपने विचार हैं।

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