संघर्ष से सफलता की मिसाल बनीं झोउ कुनफेई

कहानी लोगों के लिए प्रेरणा

संघर्ष से सफलता की मिसाल बनीं झोउ कुनफेई
चीन की झोउ कुनफेई की कहानी उन लोगों के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं। कभी परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए स्कूल छोड़कर फैक्टरी में नौकरी करने वाली झोउ आज चीन की सबसे अमीर महिला बन गई हैं।

चीन की झोउ कुनफेई की कहानी उन लोगों के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं। कभी परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए स्कूल छोड़कर फैक्टरी में नौकरी करने वाली झोउ आज चीन की सबसे अमीर महिला बन गई हैं। हुरुन रिचेस्ट विमेन इन चाइना 2026 की सूची के अनुसार उनकी अनुमानित संपत्ति 127 अरब युआन यानी करीब 1.80 लाख करोड़ रुपये हो गई है। उनकी यह उपलब्धि केवल आर्थिक सफलता नहीं, बल्कि संघर्ष, तकनीकी कौशल और उद्यमशीलता की एक उल्लेखनीय कहानी भी है। 1970 में चीन के हुनान प्रांत में जन्मीं झोउ का बचपन आर्थिक कठिनाइयों में बीता। परिवार की परिस्थितियों के कारण उन्हें किशोरावस्था में ही पढ़ाई छोड़नी पड़ी। बेहतर रोजगार की तलाश में वह शेनझेन पहुंचीं और एक घड़ी बनाने वाली फैक्टरी में काम करने लगीं। यहां उनका काम घड़ियों के लिए कांच तैयार करना था। सीमित वेतन में गुजारा करने के बावजूद उन्होंने काम को केवल नौकरी तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उत्पादन की तकनीक और कारोबारी बारीकियां भी सीखीं।

लगभग 23 वर्ष की उम्र में उन्होंने नौकरी छोड़कर अपनी छोटी ग्लास प्रोसेसिंग वर्कशॉप शुरू की। संसाधन सीमित थे, लेकिन तकनीक सीखने और गुणवत्ता सुधारने का जुनून था। धीरे-धीरे उन्होंने कारोबार का विस्तार किया और लेंस टेक्नोलॉजी नाम से कंपनी स्थापित की। यह कंपनी मोबाइल फोन, टैबलेट और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए विशेष प्रकार के ग्लास कवर बनाने लगी। उनके कारोबारी सफर में वर्ष 2007 महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। इसी दौरान कंपनी को एपल के शुरुआती आईफोन के लिए ग्लास कवर बनाने का अवसर मिला। स्मार्टफोन बाजार के तेजी से विस्तार ने उनकी कंपनी को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। बाद में सैमसंग समेत कई बड़ी इलेक्ट्रॉनिक कंपनियां भी उसकी ग्राहक बनीं। इस तरह एक छोटी वर्कशॉप वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स आपूर्ति शृंखला का अहम हिस्सा बन गई। हुरुन की 2026 की सूची के मुताबिक झोउ की संपत्ति पिछले एक वर्ष में 15 प्रतिशत बढ़ी और वह चीन की सबसे अमीर महिला बन गईं।

उनकी संपत्ति का बड़ा आधार लेंस टेक्नोलॉजी में हिस्सेदारी है। यह राशि नकद जमा नहीं, बल्कि कंपनी के शेयरों और अन्य परिसंपत्तियों के अनुमानित बाजार मूल्य पर आधारित है। इससे पहले 2015 में भी वह चीन की सबसे अमीर महिला बन चुकी थीं। झोउ छुनफेई की उपलब्धि का महत्व इसलिए भी है कि उन्होंने विरासत में मिले कारोबार के बजाय अपने अनुभव और मेहनत से उद्यम खड़ा किया। उनकी कहानी बताती है कि शिक्षा बीच में छूट जाने के बावजूद सीखने की इच्छा, तकनीकी दक्षता और अवसरों को पहचानने की क्षमता सफलता के नए रास्ते खोल सकती है। आज उनकी यात्रा चीन के विनिर्माण क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और वैश्विक कारोबार में उनकी भूमिका का भी उदाहरण है।

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