अजमेर के दवा विक्रेता से 1.11 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी : विदेश के लिए 7 शहरों में 11 प्रोडेक्ट रजिस्टर्ड कराने का दिया झांसा, जानें क्या है पूरा मामला
प्रोडेक्ट रजिस्टर्ड नहीं होने पर ठगी का आभास
अजमेर के एक दवा विक्रेता के साथ बदमाशों ने दवाइयों के रजिस्ट्रेशन के नाम पर 1 लाख 5 हजार यूरो की धोखाधड़ी करने का मामला सामने आया है। पीड़ित की शिकायत पर क्रिश्चियनगंज पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी। पुलिस के अनुसार परिवादी गुलमोहर कॉलोनी, सागर विहार, वैशाली नगर अजमेर निवासी दिनेश मुरजानी पुत्र मूलचन्द मैलिरोन फार्मा प्राइवेट लि. कंपनी के डायरेक्टर हैं। कंपनी का मुख्यालय बी-ब्लॉक पंचशील नगर में।
अजमेर। अजमेर के एक दवा विक्रेता के साथ बदमाशों ने दवाइयों के रजिस्ट्रेशन के नाम पर 1 लाख 5 हजार यूरो (लगभग 1 करोड़ 11 लाख रुपए) की धोखाधड़ी करने का मामला सामने आया है। पीड़ित की शिकायत पर क्रिश्चियनगंज पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार परिवादी गुलमोहर कॉलोनी, सागर विहार, वैशाली नगर अजमेर निवासी दिनेश मुरजानी पुत्र मूलचन्द मैलिरोन फार्मा प्राइवेट लि. कंपनी के डायरेक्टर हैं। कंपनी का मुख्यालय बी-ब्लॉक पंचशील नगर में है। दिनेश ने बताया कि उनकी कंपनी साउथ अफ्रीका के विभिन्न देशों में दवाई सप्लाई करने का कार्य करती है। जिसके लिए संबंधित देश में प्रोडेक्ट बेचने से पूर्व उसे उस देश में रजिस्टर्ड करवाना पड़ता है।
उसके बाद ही प्रोडेक्ट को भेजा जाता है। प्रोडेक्ट रजिस्टर्ड उस देश की स्थानीय कंपनी की मदद से ही किया जाता है। पीड़ित दिनेश मुरजानी का कहना है कि उनकी कंपनी के 11 प्रोडक्ट को 7 शहरों बुर्किना फासो, माली, नाईजर, कांगो ब्राजाविल, आइवरी कोस्ट, सेनेगल, मॉरिटानिया में रजिस्टर्ड करवाना था।
1.5 लाख यूरो का भुगतान किया
उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 में उनसे सेनेगल की कंपनी फार्मा डिस अफ्रिका के एजेन्ट सौलेमाने म्बेंगुए ने संपर्क किया और आश्वासन दिया था कि वह उक्त 11 प्रोडेक्ट को उपरोक्त साताें देशों में रजिस्टर्ड करवा देगा। परिवादी दिनेश ने बताया कि उसके लिए उनसे सभी विधिक औपचारिकताएं पूर्ण करने के बाद डेबिट नोट भेजे। तब हमने उन्हें अपने आईसीआईसीआई बैंक के जरिए 1 लाख 5 हजार यूरो का भुगतान किया।
प्रोडेक्ट रजिस्टर्ड नहीं होने पर ठगी का आभास
दिनेश ने बताया कि करीब 18 माह बाद भी सौलेमाने म्बेंगुए ने संपूर्ण राशि प्राप्त करने के बाद भी उनकी कंपनी के एक भी प्रोडेक्ट को किसी भी देश में रजिस्टर्ड नहीं करवाया है। पूछताछ करने पर वह टालमटोल कर रहा है और 1 लाख 5 हजार यूरो लौटा भी नहीं रहा है।

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