जिंदगीभर की कमाई सरकार के पास, कर्मचारी रिटायरमेंट के बाद भी खाली हाथ
10 महीने बाद भी जीपीएफ, ग्रेच्युटी और पेंशन के भुगतान का इंतजार
अजमेर। जिंदगी के कई दशक सरकारी सेवा में गुजार दिए। हर महीने वेतन से भविष्य के लिए बचत की। उम्मीद थी कि सेवानिवृत्ति के बाद इसी जमापूंजी से बच्चों की शादी करेंगे, घर की जरूरतें पूरी होंगी और बुढ़ापा सुकून से कटेगा। लेकिन नौकरी से विदाई के बाद भी अपनी ही कमाई हाथ नहीं आई। किसी के 41 लाख रुपए अटके हैं तो किसी के 18 लाख। किसी की पेंशन शुरू नहीं हुई तो कोई कर्ज की किस्त चुकाने के लिए परेशान है। यह पीड़ा उन हजारों सेवानिवृत्त राजकीय कर्मचारियों की है, जिन्हें तीन से दस महीने बाद भी अपने हक के परिलाभ नहीं मिले हैं। दीपावली से पहले सरकार ने महंगाई भत्ते (डीए) और बोनस की घोषणाओं से राहत देने की पहल की, लेकिन प्रदेश में ऐसे अनेक सेवानिवृत्त कर्मचारी अपनी ही जमापूंजी के भुगतान की राह देख रहे हैं। जीपीएफ, ग्रेच्युटी, राज्य बीमा, उपार्जित अवकाश का नकदीकरण और पेंशन कम्यूटेशन जैसी राशि अटकी होने से उनकी आर्थिक योजनाएं प्रभावित हो रही हैं।
बच्चों की शादी के लिए जोड़े 41 लाख, दस महीने से इंतजार :
दिसंबर 2025 में सेवानिवृत्त हुईं मधु (बदला हुआ नाम) ने दो बच्चों की शादी के लिए जीपीएफ की रकम संभालकर रखी थी। उम्मीद थी कि रिटायरमेंट पर करीब 41 लाख रुपए मिलेंगे तो विवाह की जिम्मेदारी पूरी कर सकेंगी। दस महीने बीतने को हैं और रकम नहीं मिली। अब बच्चों की शादी की योजना के साथ आर्थिक परेशानियां भी बढ़ रही हैं। एक अन्य सेवानिवृत्त महिला कार्मिक के करीब 18 लाख रुपए जीपीएफ में अटके हैं। ग्रेच्युटी और राज्य बीमा का भुगतान मिल चुका है। उपार्जित अवकाश के नकदीकरण और पेंशन कम्यूटेशन की राशि भी बाकी है। तीन महीने से अपनी ही जमापूंजी का इंतजार कर रही हैं।
65 हजार वेतन मिलता था, अब पेंशन भी नहीं :
किशनगढ़ उपखंड की सिलोरा पंचायत समिति से लेवल-1 शिक्षक पद पर कार्यरत एक कार्मिक 31 जुलाई 2026 को सेवानिवृत्त हुए। उस समय करीब 65 हजार रुपए मासिक वेतन मिलता था। लेकिन तीन महीने बाद भी पेंशन शुरू नहीं हुई। मामला राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) और पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) के बीच उलझा है। अब घर का खर्च चलाना और व्यक्तिगत ऋण की किस्त चुकाना मुश्किल हो रहा है। उनका कहना है कि विभाग में सुनवाई नहीं हो रही। इसी तरह 30 जून 2026 को सेवानिवृत्त हुई एक महिला कार्मिक को चार महीने बाद भी ग्रेच्युटी और उपार्जित अवकाश का भुगतान नहीं मिला है।
अपनी छुट्टियों के पैसों का इंतजार :
भुगतान की परेशानी केवल सेवानिवृत्त कर्मचारियों की नहीं है। सेवारत कार्मिक भी उपार्जित अवकाश के नकदीकरण की राशि के लिए इंतजार कर रहे हैं। मई में आवेदन करने के बावजूद अक्टूबर समाप्त होने तक भुगतान नहीं हुआ। ऐसे में कर्मचारियों के सामने सवाल है कि जब त्योहार पर राहत देने की घोषणाएं हो रही हैं, तो पहले से देय रकम समय पर क्यों नहीं मिल रही ?
बिल पास होने के बाद भी राशि का इंतजार :
बताया जा रहा है कि पूर्ववर्ती सरकार के समय जिला कोषालयों के वित्तीय अधिकार सीमित कर भुगतान की केंद्रीयकृत इलेक्ट्रॉनिक व्यवस्था लागू की गई थी। अब जिला कोषालय में बिलों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी राशि जयपुर से जारी होने पर निर्भरता है। ऐसे में भुगतान में देरी से कर्मचारियों की परेशानी बढ़ रही है।
इनका कहना है : अब पूरी व्यवस्था स्वचालित प्रणाली से संचालित है। राशि सीधे जयपुर स्थित वित्त विभाग से जारी होती है। पेंशन और अन्य परिलाभ मिलने में देरी का एक कारण आवेदन करने में विलंब भी हो सकता है।
- भगीरथ सिंह लखावत,
जिला कोषाधिकारी

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