किसानों पर दोहरी मार, बाहरी मजदूरों से करानी पड़ रही फसलों की कटाई
किसानों की सरकार से मदद की आस
किसानों के अनुसार सरसों की कटाई में करीब 1500 प्रति बीघा का खर्चा है जिसमें मजदूर पौधों की कटाई कर एक जगह ढेर कर रहे हैं। बाद में थ्रेसर से उपज निकालने में करीब 500 प्रति बीघा का खर्चा अलग से होता है। अब फसल पकने पर उसे काटने के लिए करवर क्षेत्र में वर्तमान में बाहरी राज्यों के एक हजार मजदूर सरसों की फसल कटाई में जुटे हुए है। ये मजदूर प्रतिदिन साढ़े तीन सौ से चार सौ रुपए मजदूरी लेते है।
करवर। करवर क्षेत्र में खेतों में सरसों की फसल की कटाई का काम युद्धस्तर पर चल रहा है। फसल कटाई के लिए स्थानीय स्तर पर मजदूर नहीं मिलने पर किसानों को उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्यप्रदेश के मजदूरों को बुलाकर अपनी फसल की कटाई करवानी पड़ रही है। वर्तमान में करवर में बाहरी राज्यों के आए एक हजार मजदूर खेतों में फसल काटने में जुटे है। किसानों का कहना है कि बाहरी मजदूर बुलाकर कटाई करवाना इनके लिए महंगा साबित हो रहा है। पहले से ही महंगे खाद बीज खरीद कर फसल की बुवाई करते है और अब जब फसल पक कर तैयार हो गई तो काटने के लिए बाहर के मजदूरों से काम करवाना काश्तकारों की जेब पर भारी पड़ रहा है। फसल का मुनाफा भी कम हो जाता है। कृषि विभाग के अनुसार करवर सहित माणी, आंतरदा, खजूरी,सहण व तलवास क्षेत्र में सरसों की 6956 हैक्टेयर बुवाई की गई। पहले बोई गई सरसों के कटने के साथ ही उपज दुकानों में भी पहुंचना शुरू हो गई है। वहीं क्षेत्र में चना 1896 हेक्टर में बुवाई हुईं है। किसानों का कहना है कि मार्च के प्रथम सप्ताह के बाद सरसों की पूरी कटाई पूरी होने का अनुमान है। क्षेत्र में गेहूं की बुवाई 2408 जबकि जौ 339 व मसूर 265 हेक्टेयर में बुवाई की गई। जिन किसानों ने पहले बुवाई कर दी थी उन खेतों में गेहूं की बालियां स्वर्णिम आभा बिखेर रही है।
फसल कटाई में खर्चा ज्यादा
किसानों के अनुसार सरसों की कटाई में करीब 1500 प्रति बीघा का खर्चा है जिसमें मजदूर पौधों की कटाई कर एक जगह ढेर कर रहे हैं। बाद में थ्रेसर से उपज निकालने में करीब 500 प्रति बीघा का खर्चा अलग से होता है। करवर निवासी किसान महावीर सिणोल्या ने बताया कि इलाके में सरसों की भरपूर पैदावार हुई है। अब फसल पकने पर उसे काटने के लिए करवर क्षेत्र में वर्तमान में उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश और बिहार के एक हजार मजदूर सरसों की फसल कटाई में जुटे हुए है। ये मजदूर प्रतिदिन साढ़े तीन सौ से चार सौ रुपए मजदूरी लेते है। बाहरी राज्यों के ये मजदूर 1400 प्रति बीघा के हिसाब से ठेका लेते है। इनका दस से बारह लोगों का समूह होता है। करीब पंद्रह दिन में ये पूरे इलाके करवर क्षेत्र में खेतों में फसल कटाई करेंगे।
बाहरी मजदूरों के लिए आवास और र्इंधन का व्यवस्था:
जब तक पूरी फसल की कटाई नहीं होगी तब तक ये मजदूर संबंधित किसान के खेत पर ही रहेेंगे। किसान उनके रहने और र्इंधन का प्रबंध करता है। इस प्रकार ये बाहर मजदूर दिनभर काम कर रात को खेत पर ही बनाए कमरे खाना पकाकर खाते है और वहीं पर आराम करते है।
खर्चा अधिक मुनाफा हो रहा कम
किसान महावीर का कहना है एमपी के राजगढ़ जिले से मोतीपुरा गांव से करीबन 12 मजदूर उसके खेत में सरसों की कटाई कर रहे हैं जिसमें 14 सौ रुपए प्रति बीघा का खर्चा आ रहा है। उसके बाद थ्रेसर से कढ़ाई के वक्त चार व्यक्तियों की 24 सौ रुपए की मजदूरी व 3 क्विंटल में 18 किलो सरसों थ्रेसर की कढ़ाई में चली जाती है। बीज बुवाई के समय 10 किलो डीएपी एक बेग यूरिया प्रति बीघा के हिसाब से खर्चा पड़ता है जिससे खेती में खर्चा ज्यादा हुआ व मुनाफा कम होने लगा है।
इन गांवों में चल रहा है सरसों की कटाई का काम
करवर क्षेत्र के क्षेत्र के माणी , कैथूदा, जरखोदा, समिधी, खजूरी,आंतरदा, खेड़ी, सहण, तलवास, आदि गांवों में सरसों की कटाई इन दिनों तेजी से चल रही है। इससे खेत खलियान किसान परिवार के साथ मजदूरों से आबाद है। दुकानों में नई सरसों की प्रतिदिन आवक जारी है जो उपज आ रही है। उसमें 3 से 5 प्रतिशत नमी की बात कही जा रही है। सरसों का भाव लगभग 5 हजार तक है। नई सरसों में नमी के कारण भाव में कमी देखी जा रही है।
अपने निजी वाहनों से मजदूरों का लाने की मजबूरी
किसान फसल की लावणी के लिए भोर होने से पहले ही खेतों पर पहुंच जाते हैं और देर शाम तक वापस घर लौटते हैं। क्षेत्र के सभी गांवों में सरसों की कटाई एक साथ चल रही है। इससे पर्याप्त मजदूर भी नहीं मिल रहे। हिरापुर निवासी रामस्वरूप मीणा ,आशाराम मीणा, पिपरवाला निवासी हेमराज मीणा ने बताया कि फसल कटाई के लिए दैनिक मजदूरी की दर 350 से 400 के बीच चल रही है। इसके बाद भी मजदूर नहीं मिलने से वे दूसरे गांवों से अपने निजी वाहन में मजदूर ला रहे हैं। इससे उन्हें स्वयं खर्चा वहन करना पड़ रहा है। इसके अलावा शाम को उनको छोड़ने जाना भी पड़ रहा है।
सरकार किसानों को दे आर्थिक संबल
इन दिनों सरसों की कटाई के लिए मजदूरों की मांग बढ़ गई। कटाई से लेकर उपज निकालने तक प्रति बीघा 3 हजार से लेकर 3 हजार पांच सौ का खर्चा अनुमानित रहेगा, जबकि सरकार को अपना खेत अपना अपना काम योजना अंतर्गत फसल का कार्य शुरू करदे तो किसानों को आर्थिक सम्बल मिल सकें।
राजेंद्र नागर, किसान नेता
सरसों में 2 से 3 विंटल प्रति बीघा के हिसाब से उत्पादन मिलने का अनुमान है। 6956 हैक्टेयर में सरसों की बुवाई की गई है पिछले एक हफ्ते से फसल कटाई शुरू भी हो चुकीं है।
बुद्धि प्रकाश सैनी, सहायक,कृषि अधिकारी, करवर
करवर में नई सरसों की आवक होने लगी है।लेकिन अभी माल कम आ रहा है। सरसों में नमी होने के कारण किसान को भी दाम कम मिल रहा है।
ज्ञानचंद जैन, व्यापारी

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