होलिका दहन का सबसे अच्छा मुहूर्त आज रात 9 बजकर 20 मिनट से लेकर रात 10 बजकर 31 मिनट तक

पूजा अर्चना के बाद करें होलिका दहन

होलिका दहन का सबसे अच्छा मुहूर्त आज रात 9 बजकर 20 मिनट से लेकर रात 10 बजकर 31 मिनट तक

होलिका दहन फाल्गुन माह की पूर्णिमा को होता है

जयपुर। होलिका दहन फाल्गुन माह की पूर्णिमा को होता है,जबकि इसके अगले दिन यानी चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा को रंग वाली होली मनायी जाती है। इस साल रंगवाली होली  18 मार्च 2022 को पड़ रही है। ज्योतिषशास्त्र के मुताबिक होलिका दहन का सबसे अच्छा मुहूर्त 17 मार्च की रात 9 बजकर 20 मिनट से लेकर रात 10 बजकर 31 मिनट तक है।


होलिका दहन के अगले दिन रंग वाली होली खेली जाती है, शास्त्रों में कहा गया है कि होलिका दहन पूजा अर्चना करने के बाद ही किया जाना चाहिए। होलिका दहन पूर्णिमा के दिन होता है, लेकिन इसके 8 दिन पहले से ही होलाष्टक लग जाता है और यह होलिका दहन के बाद खत्म होता है। होलाष्टक दरअसल एक किस्म का सूतक होता है, क्योंकि इस दौरान कोई मांगलिक कार्य करना वर्जित होता है। इस दौरान विवाह, मुंडन, सगाई, गृहप्रवेश समेत 16 संस्कार नहीं करने चाहिए। यही नहीं होलाष्टक के समय यज्ञ, हवन आदि भी नहीं करना चाहिए। होलाष्टक के समय में नौकरी परिवर्तन,लंबी यात्रा आदि से भी बचना चाहिए, नया व्यापार भी आरंभ नहीं करना चाहिए।


होलाष्टक के दौरान भजन, कीर्तन, पूजा पाठ जैसे कार्य करने चाहिए। होलाष्टक को व्रत, पूजन और हवन की दृष्टि से अच्छा समय माना गया है। इन दिनों दान पुण्य के काम करने चाहिए। ऐसा करने से जीवन के कष्टों से मुक्ति मिलती है। होलाष्टक में स्वच्छता और खान-पान का भी उचित ध्यान रखना चाहिए। इन दिनों में भगवान शिव की उपासना करें। महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें,इससे हर तरह के रोग से मुक्ति मिल जाती है। होलाष्टक के समय श्रीगणेश की वंदना बहुत फलदायी है। हनुमान चालीसा का नियमित पाठ करें। होलाष्टक के दौरान भगवान विष्णु की पूजा करने से समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। नवविवाहिताओं को होलाष्टक के दिनों में मायके में रहना चाहिए ।होलाष्टक  फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी से लग जाता है और अगले 8 दिनों तक यह रहता है। इस साल यह 10 मार्च से लगा है और 18 मार्च 2022 तक रहेगा।


धार्मिक शास्त्रों में होलिका दहन पूजा अर्चना के बाद करने के लिए कहा गया है,क्योंकि माना जाता है कि शुभ मुहूर्त में पूजा पाठ के बाद किये गये होलिका दहन से आपकी तमाम परेशानियों और संकटों का भी दहन हो जाता है। होलिका दहन की पूजा के लिए जिस सामग्री की जरूरत होती है, उसमें एक कटोरी पानी, गाय के गोबर से बने बल्लों की माला, अक्षत, रोली, अगरबत्ती, धूपबत्ती, फूल, हल्दी के कुछ टुकड़े, मूंग की दाल, सूती धागा आदि हैं। इसके अलावा गुलाल पाउडर, एक सूखा नारियल, खेत से लाये गये पक्के हुए गेंहू या दूसरे अनाज की बालें आदि चीजों से होलिका दहन की पूजा होती है।

Read More गोवा नाइट क्लब अग्निकांड में बड़ा एक्शन, थाईलैंड पुलिस की हिरासत में लूथरा ब्रदर्स, भारत प्रत्यर्पण की तैयारी शुरू


इन तमाम पूजा सामग्रियों को एक बड़ी थाली में रख लें और होलिका स्थल के पास पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुंह करके बैठ जाएं। जल, चावल, फूल और धातु के सिक्कों का होलिका को संकल्प करें और हाथ में फूल और चावल लेकर गणेश जी का स्मरण करें। इसके बाद भगवान नरसिंह का स्मरण करें और अंत में प्रहलाद का स्मरण करें, उन्हें फूल, रोली और चावल चढ़ाएं। फिर लायी गई समस्त सामग्री को होलिका को अर्पण कर दें। इसके बाद उसके चारों और चक्कर लगाएं तथा कच्चे सूत के धागे से तीन या पांच अथवा सात फेरे बांध दें।

Read More राजस्थान संपर्क पोर्टल पर बढ़ी शिकायतों के निस्तारण की रफ्तार, जयपुर जिला अव्वल

Post Comment

Comment List

Latest News

पहले झुकी और अगले ही पल चूमने लगी जमीन, तेज हवा से तिनके की तरह उड़ गई स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी की रेप्लिका, मूर्ति के गिरते ही मची भगदड़ पहले झुकी और अगले ही पल चूमने लगी जमीन, तेज हवा से तिनके की तरह उड़ गई स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी की रेप्लिका, मूर्ति के गिरते ही मची भगदड़
ब्राजील के गुआइबा शहर में सोमवार, 15 दिसंबर 2025 को आए तेज आंधी-तूफान ने भारी तबाही मचाई। इस दौरान लगभग...
नेशनल हेराल्ड मामला: अदालत ने गांधी परिवार को एफआईआर की कॉपी देने से किया इनकार
UNSC में भारत की पाकिस्तान का दो टूक, कहा-जम्मू कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न हिस्सा थे और रहेंगे…’ सिंधु जल संधि और इमरान खान को लेकर बोला तीखा हमला
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इथियोपिया के आधिकारिक दौरे पर, इन अहम मुद्दों पर होगी चर्चा
सोनिया गांधी ने उठाया संसद में महिला कर्मियों का मुद्दा, मानदेय बढाने और सामाजिक सुरक्षा की मांग की
ग्लोबल वायदा बाजार की नरमी के असर : दोनों कीमती धातुओं में गिरावट, जानें क्या है भाव
विपक्ष के विरोध के बीच "बीमा विधि संशोधन विधेयक-2025" लोकसभा में पेश