उत्तर पश्चिम रेलवे पर कार्यरत 2892 महिला रेलकर्मी निभा रही अहम जिम्मेदारियां

महिला सशक्तिकरण और महिला यात्रियों की सुविधाओं के लिए रेलवे की प्रतिबद्धता

उत्तर पश्चिम रेलवे पर कार्यरत 2892 महिला रेलकर्मी निभा रही अहम जिम्मेदारियां

रेलवे में लोको पायलेट का कार्यभार चुनौतीपूर्ण माना जाता है, जिसमें बहुत ही सतर्कता और मुस्तैदी के साथ ट्रेन संचालन करना होता है।

जयपुर। महिला सशक्तिकरण की दिशा में बढ़ते हुए उत्तर पश्चिम रेलवे पर वर्तमान में 2892 महिला कर्मचारी विभिन्न पदों पर कार्यरत हैं। यह महिलाकर्मी स्टेशन मास्टर, लोको पायलेट, ट्रेक मैंटेनर, डीजल शैड और वर्कशॉप में इंजीनियर व खलासी, रेलवे सुरक्षा बल, टीटीई, नर्सिंगकर्मी, चिकित्सक, गार्ड आदि पदों पर बखूबी अपना दायित्व निभा रही हैं। साथ ही उत्तर पश्चिम रेलवे पर कार्यरत महिला खिलाड़ियों ने भी देश-विदेश में होने वाली प्रतियोगिताओं में मैडल प्राप्त कर देश को गौरवान्वित किया हैं। उत्तर पश्चिम रेलवे पर कार्यरत 2892 महिला रेलकर्मियों में से 35 महिलाएं लोको पायलेट के पद पर कार्य कर रही हैं। रेलवे में लोको पायलेट का कार्यभार चुनौतीपूर्ण माना जाता है, जिसमें बहुत ही सतर्कता और मुस्तैदी के साथ ट्रेन संचालन करना होता है। लोको पायलेट के पद पर अब महिलाएं अपनी ड्यूटी को बखूबी कर पुरूषों के साथ-साथ कंधे से कंधा मिलाकर कार्य कर रही हैं। रेलवे में अन्य महत्वपूर्ण और चुनौती वाले कार्य जैसे ट्रैक मेंटेनर के पद पर 199, पोइन्टसमैन के पद पर 138, स्टेशन मास्टर के पद पर 66 और ट्रेन मैनेजर (गार्ड) के पद पर 15 महिला कर्मचारी अपनी सेवाएं दे रही हैं। 

228 महिला सुरक्षाकर्मी कार्यरत
उत्तर पश्चिम रेलवे पर सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए रेलवे सुरक्षा बल में महिला बटालियनों की स्थापना की गई है। वर्तमान में उत्तर पश्चिम रेलवे पर 228 महिला सुरक्षाकर्मी कार्यरत हैं, जो महिला सुरक्षा अभियान मेरी सहेली में अहम भूमिका का निर्वहन कर रही है। महिला सशक्तिकरण की दिशा में पहल करते हुए उत्तर पश्चिम रेलवे के गांधीनगर जयपुर स्टेशन को सम्पूर्ण भारतीय रेल में पहले गैर उपनगरीय स्टेशन के रूप में 19 फरवरी, 2018 को स्थापित किया गया, जो पूर्णतया महिलाओं की ओर से संचालित किया जा रहा हंै। यहां सभी पदों पर स्टेशन मास्टर से कांटेवाला, मुख्य आरक्षण पर्यवेक्षक, टिकट संग्राहक से रेल सुरक्षा बल की कमान महिलाओं की ओर से संभाली जा रही हैं। गांधीनगर जयपुर स्टेशन पर कार्यरत महिला कर्मचारियों को आत्मविश्वास से कार्य करने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया गया हैं, जिसके कारण यहां कार्यरत् महिला रेलकर्मी बेहतर और पूर्ण आत्मविश्वास के साथ कार्य कर रही है। उत्तर पश्चिम रेलवे के गांधीनगर स्टेशन पर समस्त महिला कर्मचारी पूर्ण उत्साह के साथ अपने कार्यों निष्पादित कर रही और वर्तमान में गांधीनगर जयपुर सबसे कार्यकुशल स्टेशन की श्रेणी में सम्मलित है।

यह सुविधा उपलब्धमहिला कोच
लम्बी दूरी की एक्सप्रेस ट्रेनों में महिलाओं के लिए एक अलग अनारक्षित डिब्बा लगा होता 
है, जो गार्ड के केबिन से जुड़ा होता है। 

लोअर बर्थ का कोटा
सभी मेल, एक्सप्रेस ट्रेनों में सभी आरक्षित श्रेणियों में वरिष्ठ नागरिकों के साथ-साथ 45 वर्ष या अधिक आयु की महिला यात्रियों के लिए और गर्भवती महिलाओं (चिकित्सक के प्रमाण पत्र के साथ) के लिए शयनयान श्रेणी के प्रत्येक डिब्बें में 7 लोअर बर्थ का तथा थर्ड एसी-सैकण्ड एसी के प्रत्येक डिब्बें में 4 लोअर बर्थ का संयुक्त कोटा होता हैं। राजधानी/दुरंतों या पूर्णतया वातानुकूलित एक्सप्रेस ट्रेनों में सैकण्ड एसी में 4 तथा थर्ड एसी में 5 सीट का यह कोटा आवंटित हैं।

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महिला कोटा
गरीबरथ एक्सप्रेस ट्रेन में थर्ड एसी श्रेणी में 6 बर्थ का पृथक कोटा महिलाओं के लिए दिया गया है, जिसमें आयु का कोई बंधन नहीं है। इस कोटे का उपयोग केवल महिला यात्रियों द्वारा किया जाएगा, जो अकेले या महिला समूह में यात्रा कर रही हैं। आरक्षण सुविधा वाली गाड़ियों में मेल-एक्सप्रेस गाड़ियों के शयनयान श्रेणी में 6 बर्थ का कोटा महिलाओं के लिए चिन्हित किया गया हैं।

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महिला कोटा का आवंटन
महिलाओं के लिए कोटे की सीटों के उपयोग में प्रथम आरक्षण चार्ट बनने तक इस कोटे में सिर्फ अकेली महिला या महिलाओं के समूह का आरक्षण होगा। प्रथम आरक्षण चार्ट के तैयार होते समय अप्रयुक्त महिला कोटे के सीटों को पहले महिला वेटिंग यात्रियों को दिया जाएगा। इसके बाद बची हुई महिला कोटे की बर्थ वरिष्ठ नागरिकों को दी जाएगी। प्रथम आरक्षण चार्ट बनने के बाद अकेली महिला यात्रियों को बर्थ आवंटन के बाद भी यदि महिला कोटे की बर्थ बचती है, तो कार्यरत टिकट चैकिंग स्टाफ इन बर्थों को आरएसी कन्फर्म टिकटों पर अन्य महिला/वरिष्ठ नागरिकों को आवंटित कर सकेगा। 

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