फर्जी छात्रवृत्ति घोटाले में गिरी गाज, 46 शिक्षण संस्थान डिबार कर ब्लैकलिस्ट

छात्रवृत्ति पोर्टल से हुए डिबार

फर्जी छात्रवृत्ति घोटाले में गिरी गाज, 46 शिक्षण संस्थान डिबार कर ब्लैकलिस्ट
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने करोड़ों की फर्जी छात्रवृत्ति मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए 46 शिक्षण संस्थानों को ब्लैकलिस्ट कर दिया है। ई-मित्र संचालक विजय कुमार से जुड़ी जांच में कूटरचित दस्तावेजों और एसओपी (SOP) के उल्लंघन का खुलासा हुआ है। विभाग ने इन संस्थानों को 3 से 5 साल के लिए पोर्टल से डिबार कर लंबित आवेदन निरस्त कर दिए हैं।

जयपुर। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर करोड़ों की छात्रवृत्ति प्राप्त करने के मामले में 46 शिक्षण संस्थानों को छात्रवृत्ति पोर्टल से डिबार (प्रतिबंधित) कर ब्लैकलिस्ट कर दिया है। विभागीय जांच में सामने आया कि इन संस्थानों ने छात्रवृत्ति आवेदनों का समुचित सत्यापन किए बिना कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर आवेदन अग्रेषित किए, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने का प्रयास हुआ। विभाग ने सभी संबंधित संस्थानों के लंबित छात्रवृत्ति आवेदन भी निरस्त कर दिए हैं।

योजना का नहीं ले सकेंगे लाभ: जांच समितियों, जिला अधिकारियों की रिपोर्ट तथा उपलब्ध अभिलेखों के परीक्षण के बाद विभाग ने संबंधित संस्थानों को आदेश जारी होने की तिथि से तीन वर्ष अथवा होल्ड किए जाने की तिथि से पांच वर्ष (जो भी बाद में हो) तक छात्रवृत्ति पोर्टल से डिबार करने का निर्णय लिया है। इस अवधि में ये संस्थान छात्रवृत्ति योजना का लाभ नहीं ले सकेंगे।

ई-मित्र संचालक की जांच में खुला मामला: निदेशक एवं संयुक्त शासन सचिव ललित कुमार के आदेशानुसार यह कार्रवाई फर्जी छात्रवृत्ति प्रकरण के मुख्य आरोपी ई-मित्र संचालक विजय कुमार बोचल्या से जुड़े मामले की जांच के बाद की गई। जांच में विभिन्न शिक्षण संस्थानों के छात्रवृत्ति आवेदन पत्रों की रैंडम जांच में कई गड़बड़ी सामने आईं। संस्थानों ने 2015 के दिशा-निर्देश 2023 की मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तथा 2024 के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए अपात्रों के आवेदनों को सत्यापित कर जिला अधिकारियों को भेजा।

आवेदन में मिथ्या घोषणा, फर्जी दस्तावेज:  विभाग ने कहा कि फर्जी आवेदन भेजना नियमों का उल्लंघन माना गया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी आवेदन में मिथ्या घोषणा, फर्जी दस्तावेज मिलते हैं तो संबंधित संस्था के विरुद्ध  कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। 

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