डिजिटल अरेस्ट कर 90 वर्षीय पूर्व जिला जज से 2.50 करोड़ रुपए की ठगी, बैंक मैनेजर की सतर्कता से बची पीपीएफ की रकम
पीपीएफ की रकम ट्रांसफर कराने पहुंचे तो खुला राज
जयपुर। ज्योतिनगर थाना इलाके में साइबर ठगों ने सीबीआई अधिकारी और आरबीआई मैनेजर बनकर 90 वर्षीय पूर्व जिला जज को करीब 15 दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा। मुंबई में 50 करोड़ रुपए के हवाला लेनदेन में फंसाने और गिरफ्तारी का डर दिखाकर आरोपियों ने 3 से 10 अगस्त के बीच अलग-अलग बैंक खातों में 2.50 करोड़ रुपए ट्रांसफर करवा लिए। बुधवार को पीपीएफ की रकम भी ट्रांसफर कराने के दौरान भारतीय स्टेट बैंक के प्रबंधक को संदेह हुआ और ठगी का खुलासा हो गया।
सीबीआई अधिकारी बन धमकाया : पुलिस के अनुसार लालकोठी स्कीम निवासी पूर्व जिला जज गणपत सिंह भण्डारी के भांजे रविन्द्र सिंह मोहनोत ने मामला दर्ज कराया है। रिपोर्ट के अनुसार ठगों ने वॉट्सऐप वीडियो कॉल किया जिसमें वह पुलिस की वर्दी पहने हुए था। खुद को मुंबई सीबीआई का अधिकारी बताया। उसने कहा कि मुंबई में 50 करोड़ रुपए के हवाला लेनदेन का खुलासा हुआ है, जिसमें 40 लाख रुपए उनके एसबीआई खाते में आए हैं। जांच में सहयोग नहीं करने पर गिरफ्तारी कर मुंबई ले जाने की धमकी दी गई। कुछ देर बाद दूसरे व्यक्ति ने वॉट्सऐप कॉल कर खुद को आरबीआई का प्रबंधक बताया। उसने हवाला की रकम से म्यूचुअल फंड में निवेश किए जाने की बात कहते हुए वित्तीय दस्तावेज और अन्य जानकारी मांगी। गिरफ्तारी के डर से पूर्व जज ने आरोपियों को जरूरी दस्तावेज और जानकारी उपलब्ध करा दी। इसके बाद ठगों ने जांच के नाम पर अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर करानी शुरू कर दी। हर कॉल के बाद वॉट्सऐप चैट, कॉल हिस्ट्री और संदेश मिटाने के निर्देश दिए जाते थे। भय के कारण पीड़ित रिकॉर्ड डिलीट करते रहे और परिवार को भी इसकी जानकारी नहीं हो सकी।
पीपीएफ की रकम ट्रांसफर कराने पहुंचे तो खुला राज : बुधवार सुबह आरोपियों ने पूर्व जज से पीपीएफ खाते की रकम भी ट्रांसफर करने को कहा। इसके लिए वे एसबीआई की जौहरी बाजार शाखा पहुंचे। रकम ट्रांसफर कराने की प्रक्रिया के दौरान बैंक प्रबंधक को संदेह हुआ। पूछताछ में पूरी जानकारी सामने आने पर प्रबंधक ने लेनदेन रुकवा दिया और पूर्व जज को बताया कि वे साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं। इसके बाद पूर्व जज ने बुधवार शाम ज्योति नगर थाने में मामला दर्ज कराया गया। पुलिस अब आरोपियों के इस्तेमाल किए गए बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और लेनदेन की जांच कर रही है।

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