अवैध पटाखा फैक्ट्री में भीषण आग : 7 लोगों की मौत, छोटे से मकान में हो रही थी संचालित

आसमान तक उठा धुएं का गुबार

अवैध पटाखा फैक्ट्री में भीषण आग : 7 लोगों की मौत, छोटे से मकान में हो रही थी संचालित
जयपुर के खोनागोरियान में पटाखा फैक्ट्री में भीषण आग लगने से बड़ा हादसा हो गया। फैक्ट्री में रखी विस्फोटक सामग्री के कारण हुए धमाकों में 5 मजदूरों की मौत हो गई। दमकल की गाड़ियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। प्रशासन मामले की जांच में जुटा है।

जयपुर। खो नागोरियन थाना इलाके में पीली की तलाई इलाके में संचालित एक अवैध पटाखा फैक्ट्री में मंगलवार दोपहर भीषण आग लग गई। आग इतनी विकराल थी कि धुएं के गुबार आसमान तक दिखाई देने लगे। हादसे के दौरान फैक्ट्री में मौजूद कई मजदूर आग की चपेट में आ गए। सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं तथा कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार फैक्ट्री परिसर में बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री रखी हुई थी, जिसके कारण आग तेजी से फैल गई और कई धमाके भी हुए।

बताया जा रहा है कि हादसे में करीब 5 मजदूर गंभीर रूप से झुलस गए थे। उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उपचार के दौरान 3 मजदूरों की मौत हो गई। वहीं 5 अन्य घायलों का एसएमएस अस्पताल में ईलाज जारी है।  हालांकि प्रशासन की ओर से अभी तक मृतकों की संख्या की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद हैं तथा आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है। राहत एवं बचाव कार्य जारी है। पुलिस कमिश्नर जयपुर सचिन मित्तल डीसीपी ईस्ट रंजीत शर्मा एडिशनल डीसीपी आलोक सिंघल समेत एसीपी मालवीय नगर विनोद शर्मा समेत कार्यालय अधिकारी मौके पर मौजूद हैं।

ढाई साल से चल रही थी अवैध फैक्ट्री

जानकारी के अनुसार पटाखे की यह अवैध फैक्ट्री थाने के पीछे मात्र 200 मीटर दूर स्थित है। यह अवैध तरीके से चलाई जा रही थी। केवल 50 वर्ग गज के 3 मंजिला मकान में यह फैक्ट्री संचालित की जा रही थी। यहां सुरखा के कोई इंतजाम नहीं थे। पटाखा फैक्ट्री चलाने के लिए प्रशासन से कोई अनुमति भी नहीं ली गई थी। एक अज्ञात का शव मोर्चरी में रखवाया। पुलिस ने बताया पटाखे से लगी आग के मामले में एसएमएस में एक अज्ञात व्यिक्त का पूरा जला हुआ शव पहुंचा है वहीं, तीन शख्स नासिर उम्र 23 साल निवासी खो नागोरियन, आदिब उम्र 25 साल निवासी खो नागोरियन और समीर उम्र 30 साल ये 80 प्रतिशत से झुलसे हुए है।

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पटाखा फैक्ट्री में लगी भीषण आग के बाद झुलसे छह लोगों को गंभीर हालत में SMS अस्पताल लाया गया। उपचार के दौरान एक घायल ने दम तोड़ दिया, जबकि पांच अन्य मरीजों का इलाज जारी है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार तीन घायलों की हालत बेहद गंभीर बनी हुई है। अस्पताल अधीक्षक डॉ. मृणाल जोशी के निर्देशन में विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम घायलों के उपचार में जुटी हुई है। गंभीर रूप से झुलसे मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।

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पानी पिलाने गया था, मौत बनकर आया धमाका

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हादसे में जान गंवाने वाला 15 वर्षीय रब्बिल फैक्ट्री से महज कुछ घर दूर रहता था। परिजनों के अनुसार वह अक्सर फैक्ट्री में काम करने वाले लोगों को घर से ठंडा पानी ले जाकर पिलाता था। मंगलवार को भी वह पानी की बोतल लेकर अंदर गया था, तभी अचानक विस्फोट हो गया। मासूम की मौत के बाद उसकी मां नजमीन का रो-रोकर बुरा हाल है। वह बार-बार यही कहती रही—"मेरा बेटा मुझे लौटा दो।" मौके पर मौजूद लोगों की आंखें भी यह मंजर देखकर नम हो गईं।

स्थानीय लोगों में प्रशासन के प्रति नाराजगी

स्थानीय निवासी नौशाद ने आरोप लगाया कि हादसे के काफी देर बाद तक पुलिस और दमकल की टीमें नहीं पहुंचीं। शुरुआती राहत और बचाव कार्य पूरी तरह स्थानीय लोगों ने ही संभाला। लोगों का कहना है कि समय पर मदद पहुंचती तो नुकसान कम हो सकता था।

रिहायशी इलाके में चल रहे कई अवैध कारखाने

हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि क्षेत्र में केवल पटाखा फैक्ट्री ही नहीं, बल्कि कई अन्य अवैध गोदाम और छोटे कारखाने भी संचालित हो रहे हैं। इनमें खाद्य उत्पाद बनाने की इकाइयां, कबाड़ और अन्य ज्वलनशील सामग्री के गोदाम शामिल हैं, जो घनी आबादी के बीच चल रहे हैं।

मंगलवार बाजार होता तो मच जाती तबाही

स्थानीय निवासी समीर के अनुसार हादसे वाली जगह और आसपास की गलियों में प्रत्येक मंगलवार को हाट बाजार लगता है। सौभाग्य से विस्फोट बाजार शुरू होने से पहले हुआ। यदि हादसा बाजार के दौरान होता तो सैकड़ों लोगों की जान खतरे में पड़ सकती थी और यह राजधानी के सबसे बड़े औद्योगिक हादसों में शामिल हो जाता।

जांच के घेरे में अवैध फैक्ट्री संचालन

हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि घनी आबादी के बीच अवैध पटाखा फैक्ट्री आखिर किसकी अनुमति से संचालित हो रही थी। प्रशासन अब फैक्ट्री के लाइसेंस, संचालन और सुरक्षा मानकों की जांच में जुट गया है। वहीं पूरे क्षेत्र में अवैध कारखानों के खिलाफ कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। 

 

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