एआई अभिव्यक्त को दोहराता है, मानव बुद्धि अनकहे को रचती है: प्रसून जोशी
जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में रचनात्मकता, संवेदनशीलता और मानव बुद्धि पर सारगर्भित संवाद
जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में प्रसून जोशी ने कहा कि एआई केवल संकलित डेटा है, जबकि मानव रचनात्मकता अनकहे 'अव्यक्त' को रचती है।
जयपुर। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के फ्रंट लॉन में रविवार को आयोजित सत्र में गीतकार और लेखक प्रसून जोशी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मानव रचनात्मकता के बीच मूलभूत अंतर को रेखांकित किया। किश्वर लाल देसाई के साथ बातचीत में उन्होंने कहा कि एआई में वास्तव में “आर्टिफिशियल” जैसा कुछ नहीं होता, क्योंकि उसका समूचा आधार मानव द्वारा तैयार किए गए डेटा पर टिका होता है। एआई वही बता सकता है जो पहले से कहा, लिखा या व्यक्त किया जा चुका है।
प्रसून जोशी ने स्पष्ट किया कि मानव बुद्धि की विशिष्टता यह है कि वह अभिव्यक्त से आगे जाकर अनकहे को रच सकती है-ऐसे विचार, दर्शन और दृष्टियां जो अब तक देखी या लिखी नहीं गईं। उन्होंने कहा कि रचनात्मक लेखन महज तकनीक नहीं, बल्कि गहरी संवेदनशीलता की उपज है। संवेदना ही वह शक्ति है जो कल्पना को जन्म देती है और नई राहें खोलती है। सत्र में श्रोताओं ने इस विचारोत्तेजक संवाद का गर्मजोशी से स्वागत किया।

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