अशोक गहलोत ने छात्रावास भूमि निरस्तीकरण को बताया दुर्भाग्यपूर्ण, कहा– युवाओं और सामाजिक न्याय पर प्रहार
सरकारें तो बदलती रहती हैं परन्तु सत्ता का अहंकार इतना नहीं होना चाहिए
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने छात्रावासों की जमीनें निरस्त किए जाने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के समय ओबीसी और दलित समुदायों के लिए आवंटित भूमि रद्द करना संकुचित सोच दर्शाता है। गहलोत ने आरोप लगाया कि इससे गरीब विद्यार्थियों की उच्च शिक्षा प्रभावित होगी और सरकार से जनहितकारी आवंटन तुरंत बहाल करने की मांग की।
जयपुर। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रदेश में कई छात्रावासों की जमीनें निरस्त करने की कार्यवाही को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है।
गहलोत ने कहा है कि भाजपा सरकार द्वारा कांग्रेस सरकार के समय प्रदेश में विभिन्न समाजों, विशेषकर पिछड़े वर्गों (ओबीसी) और दलित समुदायों को छात्रावास निर्माण हेतु आवंटित जमीनों को रद्द करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और संकुचित मानसिकता का परिचायक है। हमारी सरकार ने यह आवंटन इसलिए किए थे ताकि गांव-ढाणी से आने वाले गरीब और पिछड़े वर्ग के बच्चे शहरों में रहकर उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकें। शहरों में छात्रावास न होने के कारण इन समाजों के होनहार परन्तु आर्थिक रूप से कमजोर पृष्टभूमि के विद्यार्थी पढ़ाई से वंचित रह जाते हैं। सरकारें तो बदलती रहती हैं परन्तु सत्ता का अहंकार इतना नहीं होना चाहिए कि आप राजनीतिक द्वेष के चलते युवाओं के भविष्य और सामाजिक उत्थान के कार्यों पर ही प्रहार करने लगें। सरकार से आग्रह करता हूँ कि इन जनहितकारी आवंटनों को तुरंत बहाल करें, ताकि सामाजिक न्याय की अवधारणा प्रभावित न हो।

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