सावधान! अब झूठे मुकदमे दर्ज कराए तो सख्ती से निपटेगी पुलिस, बदमाशों पर भी कसेगी नकेल

आईपीसी, सीआरपीसी और अन्य कानूनों में बदलाव की तैयारी

  सावधान! अब झूठे मुकदमे दर्ज कराए तो सख्ती से निपटेगी पुलिस, बदमाशों पर भी कसेगी नकेल

पुलिस मुख्यालय ने संशोधन का प्रस्ताव गृह विभाग को भेजा

जयपुर। झूठे मुकदमे दर्ज करवाकर पुलिस का समय और लोगों की छवि खराब करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए आईपीसी और सीआरपीसी की पुरानी धाराओं में संशोधन की तैयारी है।  जो हत्या, लूट, डकैती के फरार बदमाशों को पनाह देता है, उसे भी अब सात साल तक जेल में रखने की तैयारी है। लोगों के खातों से आए रुपए निकालने वालों को 10 साल की सजा और सार्वजनिक सम्पत्ति को हानि पहुंचाने वालों से इसकी भरपाई की भी तैयारी है। सब-कुछ ठीक रहा तो पुलिस जल्द ही ऐसे ही कई मामलों में अपराधियों पर नकेल कसेगी। पुलिस मुख्यालय ने आईपीसी, सीआरपीसी, लोकल एवं स्पेशल एक्ट, आर्म्स एक्ट, आईटी एक्ट और पीडीपीपी एक्ट की धाराओं में संशोधन का एक प्रस्ताव गृह विभाग को भेजा है। अब गृह विभाग इस पर आगे की कार्रवाई करेगा।

राजकीय सम्पत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले अपराधों को राज्य स्तर पर वापस नहीं लिए जाने का हो प्रावधान

आईपीसी में ये बदलाव
आईपीसी की कुछ अहम धाराओं में संशोधन की तैयारी है। आइए, जानें कि किन धाराओं में क्या-क्या संशोधन प्रस्तावित हैं :
1. धारा 182 में 211 को संज्ञेय बनाना, ताकि झूठे मुकदम न हों। 
2. धारा 325 के गम्भीर मामले अजमानतीय अपराध बनें।
3. धारा 212, 216 के अपराध अजमानतीय और आश्रय देने वाले को सात साल या अधिक मिले।
4. अवैध कब्जा के संबंध में धारा 447 (क) अजमानती हो और सजा बढ़े।
5.  धारा 375 में स्पष्ट प्रावधान हों।
6. सार्वजनिक मार्ग को रोकने की धारा 283 में सजा बढ़े और संज्ञेय बने।
7. 1 लाख तक की चोरी में 5, 2 लाख की चोरी में 7 और अधिक की चोरी में 10 साल तक की सजा हो।
8. चेन स्नैचिंग संबंधी अपराध के लिए अलग से धारा 379क बने।
9. धारा 497 में पुरुष के साथ-साथ महिला को भी दोषी माना जाए। यह धारा व्यभिचार से संबंधित है।
10. आईपीसी में जहां भी जुर्माने का प्रावधान है, वहां राशि बढ़े।

   

सीआरपीसी में ये
1. धारा 167 में रिमाण्ड के लिए आईओ ही सक्षम अधिकारी बने।
2. थानों में जब्त वाहनों के निस्तारण का अधिकार एसपी और कार्यपालक मजिस्ट्रेट को मिले।
3. धारा 172 (2) केस डायरी मंगाने के प्रावधान में एनी क्रिमिनल कोर्ट के बजाय ओनली क्रिमिनल कोर्ट हो।
4. धारा 164 सीआरपीसी के प्रावधान 164 (5)(क)(क) में आईपीसी धारा 354, 354क से घ तक के अपराध सम्बन्ध में पीड़िता के बयानों की अनिवार्यता समाप्त हो।
5. धारा 161 आईपीसी के सम्बन्ध में पॉक्सो एक्ट, 376, 354 आईपीसी तथा महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में पीड़िता के बयानों की वीडियोग्राफी अनिवार्य हो और इन बयानों को 164 के कथनों के समकक्ष महत्व दिया जाए। इससे अमुश्किलें दूर होंगी और मुकरने के मौके कम होंगे।
लोकल एवं स्पेशल एक्ट
1. सोशल मीडिया पर हथियारों के प्रदर्शन को अपराध की श्रेणी में रखा जाए।
2. स्वापक ओषधि एवं मन: प्रभावी मामलों की जांच एसआई को मिले।
3. एनडीपीएस एक्ट में चालान पेश करने की अवधि कम मात्रा में 60, नॉन कॉमर्शियल में 90 और कॉमर्शिलय की 120 दिन हो।
4.  मोटर व्हीकल एक्ट की राशि परिवहन विभाग के बजाय पुलिस अधीक्षक के नियन्त्रण में संचय कोष में जमा हो।



   
   
   
  

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