भड़ाना हत्याकांड : मुख्य आरोपी समेत 9 गिरफ्तार, 3 और दबोचे
रिश्तेदारों के यहां ली शरण
भरतपुर। पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना हत्याकांड में पुलिस ने शनिवार को तीन और आरोपियों कपिल, लाखन और जितेंद्र को गिरफ्तार किया। इसके साथ ही मामले में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या नौ हो गई है। इससे एक दिन पहले शुक्रवार को पुलिस ने मुख्य आरोपी बताए जा रहे मुकेश फौजी को करौली-धौलपुर बॉर्डर के पास डांग के जंगलों से पकड़ा था। पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ कर वारदात की पूरी कड़ी जोड़ने में जुटी है।
क्रशर प्लांट पर हमला
पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना पर 11 अक्टूबर की शाम करीब 6:30 बजे भरतपुर जिले के भौंडा गांव स्थित उनके क्रशर प्लांट पर हमला हुआ था। क्रशर को दोबारा शुरू करने और लीज तक जाने वाले रास्ते को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। इसी बीच ग्रामीणों और भड़ाना पक्ष के बीच तनाव बढ़ गया।
रिपोर्टों के मुताबिक, हमले में भड़ाना और उनके सहयोगी गगन शर्मा घायल हो गए। भड़ाना को पहले वैर के अस्पताल ले जाया गया, फिर गंभीर हालत में जयपुर के SMS अस्पताल रेफर किया गया। रविवार रात करीब 11:30 बजे इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। मामले में उनकी पत्नी कमलेश भड़ाना की शिकायत पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की थी।
कपिल, लाखन और जितेंद्र गिरफ्तार
पुलिस ने शनिवार को कार्रवाई करते हुए कपिल, लाखन और जितेंद्र को गिरफ्तार किया। इससे पहले भागमल, सोनी, शेरसिंह, बलदेव और कुंवरसिंह को गिरफ्तार किया गया था। इन पांचों को दो दिन के पुलिस रिमांड के बाद अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया। मुख्य आरोपी बताए जा रहे मुकेश फौजी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब तक नौ आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है।
रिश्तेदारों के यहां ली शरण, फिर डांग के जंगलों में पहुंचा
पुलिस के अनुसार, मुकेश फौजी फरारी के दौरान लगातार ठिकाने बदल रहा था। शुरुआत में उसने रिश्तेदारों के यहां शरण ली। पुलिस की दबिश बढ़ने पर वह डांग के जंगलों की ओर चला गया। इसके बाद गढ़ी बाजना, करौली और धौलपुर के आसपास ठिकाने बदलता रहा। लोकेशन मिलने के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। मुकेश फौजी सेना की फाइव राजपूत रेजिमेंट में नायब सूबेदार के पद पर सेवाएं देने के बाद सेवानिवृत्त हुआ था। उसने करीब 24 साल सेना में नौकरी की थी।
दो साल से लीज विवाद में सक्रिय था मुकेश
मुकेश फौजी क्रशर लीज के रास्ते को बंद कराने की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन में सक्रिय था। करीब दो साल तक धरने और कानूनी लड़ाई के दौरान उसकी अहम भूमिका बताई जा रही है। पुलिस अब इस पुराने विवाद और हत्याकांड से पहले के घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
जिला परिषद चुनाव लड़ने की भी थी तैयारी
जांच से जुड़े विवरणों के अनुसार, मुकेश पिछले तीन महीने से जिला परिषद सदस्य का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा था। उसने वार्ड आठ से चुनाव लड़ने के पोस्टर भी लगाए थे और कांग्रेस से टिकट मांगने की चर्चा थी। हालांकि, उसकी चुनावी तैयारी और राजनीतिक संपर्कों का हत्याकांड से कोई सीधा संबंध है या नहीं, इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। पुलिस को उम्मीद है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में वारदात की परिस्थितियों, अन्य संदिग्धों की भूमिका और कथित साजिश से जुड़े अहम तथ्य सामने आ सकते हैं। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के आधार पर की जाएगी।

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