पटाखे जलाते समय सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव, जलने पर 20 मिनट बहते पानी से दें प्राथमिक उपचार
कई चोटें पूरी तरह रोकी जा सकती
जयपुर। दिवाली पर आतिशबाजी के दौरान थोड़ी सी लापरवाही गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, सावधानी और सही प्राथमिक उपचार से अधिकांश हादसों की गंभीरता को कम किया जा सकता है। पटाखों से होने वाली कई चोटें पूरी तरह रोकी जा सकती हैं। बच्चों को पटाखे जलाते समय हमेशा वयस्कों की निगरानी में रखना चाहिए।
ये बरतें सावधानी :
फोर्टिस अस्पताल के प्लास्टिक सर्जरी विभाग के एडिशनल डायरेक्टर डॉ. संदीपन मुकुल ने बताया कि पटाखे खुले स्थान पर ही जलाएं। वाहनों, गैस सिलेंडर, पेट्रोल, बिजली के उपकरणों और ज्वलनशील पदार्थों से दूरी रखें। शरीर से फिट सूती कपड़े और बंद जूते पहनें। आस-पास पानी, रेत या फायर एक्सटिंग्विशर जरूर रखें। बुजुर्गों और सांस संबंधी बीमारी से पीड़ित लोगों को धुएं से दूर, हवादार स्थान पर रहना चाहिए। जलने पर संबंधित व्यक्ति को तुरंत आग के स्रोत से दूर करें और जले हुए हिस्से को करीब 20 मिनट तक ठंडे बहते पानी के नीचे रखें। सूजन से पहले अंगूठी, घड़ी और तंग कपड़े हटा दें, लेकिन त्वचा से चिपकी वस्तु को जबरदस्ती न हटाएं। ठंडा करने के बाद जले हिस्से को साफ, स्टेराइल ड्रेसिंग या क्लिंग फिल्म से हल्के से ढकें। जले स्थान पर टूथपेस्ट, घी, मक्खन, तेल या बर्फ न लगाएं और फफोलों को न फोड़ें।

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