प्रदेश के कोचिंग संस्थानों पर केंद्र के मानदंड होंगे लागू, अब कसेगी लगाम 

कोई कोचिंग नियमों का उल्लंघन करेगी तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी

प्रदेश के कोचिंग संस्थानों पर केंद्र के मानदंड होंगे लागू, अब कसेगी लगाम 

डीएम के अधीन एक जिला स्तरीय समिति संबंधित जिलों में कार्यान्वयन की निगरानी करेगी। यदि कोई कोचिंग नियमों का उल्लंघन करेगी तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।  

जयपुर। प्रदेश में कोचिंग संस्थानों को 16 साल से कम उम्र के छात्रों या 10वीं कक्षा पूरी करने तक छात्रों का नामांकन करने ये प्रतिबंधित किया गया है। केंद्र सरकार द्वारा बीती 28 फरवरी को कोचिंग संस्थानों के नियमन के लिए जारी दिशा-निर्देशों को लागू करने के लिए राज्य के उच्च शिक्षा विभाग ने सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं। जिला कलेक्टरों के फीडबैक के आधार पर आगामी शैक्षणिक सत्र 2024-25 में इन निर्देशों को लागू किया जाएगा। इस कदम का सबसे ज्यादा असर कोटा, सीकर और जयपुर के कोचिंग संस्थानों पर पड़ेगा। उच्च शिक्षा विभाग के निर्देशों में समन्वयकों को इसका कार्यान्वयन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। डीएम के अधीन एक जिला स्तरीय समिति संबंधित जिलों में कार्यान्वयन की निगरानी करेगी। यदि कोई कोचिंग नियमों का उल्लंघन करेगी तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।  

कक्षाएं पांच घंटे से अधिक नहीं चलेंगी 
निर्देशानुसार कोचिंग कक्षाएं स्कूल के समय से टकरानी नहीं चाहिए, जिससे संस्थानों को पहले छह माह में कक्षाएं आयोजित करने का कोई मौका नहीं मिलेगा। यह भी स्पष्ट है कि एक बैच के लिए कक्षाएं पांच घंटे से अधिक नहीं चलेंगी। कोचिंग कक्षाओं का पहला बैच सुबह पांच बजे शुरू होता है और रात 8 बजे तक चलता है।

लापरवाह मार्केटिंग पर भी रोक 
 होर्डिंग पर टॉपर्स की तस्वीरें लगाने और सप्ताह में एक छुट्टी अनिवार्य करने की लापरवाह मार्केटिंग रणनीति पर भी रोक लगाएंगे। यहां तक कि कोचिंग संस्थानों को साप्ताहिक, मासिक और त्रैमासिक परीक्षणों के परिणामों को व्हाट्सएप समूहों पर सार्वजनिक रूप से प्रकट करने से भी रोक दिया गया है।

40 हजार से ज्यादा छात्रों की उम्र कम
प्रदेश के जयपुर, सीकर और कोटा में नामांकित 20% छात्र 16 वर्ष से कम उम्र के हैं। दिशा-निर्देशों का उद्देश्य छात्रों को तनाव मुक्त करना है। वहीं, जून से दिसंबर के व्यस्त महीनों में एनईईटी और जेईई के लिए कोटा कोचिंग सेंटरों में नामांकित दो लाख छात्रों में से 40 हजार 16 वर्ष से कम उम्र के हैं। शिक्षा विशेषज्ञ डॉ. आरबी कुमातव के अनुसार छात्र, कक्षा 6 से ही, ओलंपियाड-भौतिकी, रसायन विज्ञान, खगोल विज्ञान और गणित को पास करने के तत्काल उद्देश्य से पूर्व-पोषण कक्षाओं में दाखिला लेते हैं। इसके अलावा राष्ट्रीय प्रतिभा खोज परीक्षा और किशोर वैज्ञानिक प्रोत्साहन योजना (केवीपीवाई) जैसी परीक्षाओं के लिए भी छात्र कोचिंग आते हैं। इस कदम से कोचिंग संस्थानों के भूतिया स्कूलों पर असर पड़ेगा। छात्र इन भूतिया स्कूलों में दाखिला लेते हैं, जो भौतिक रूप से नहीं होते और न ही कोई कक्षाएं होती हैं।  ये छात्र इन स्कूलों में जाने के बजाय, कोचिंग सेंटर में आते हैं, जो उन्हें उनकी कक्षा के विषय पढ़ाते हैं और उन्हें कोचिंग परीक्षाओं के लिए तैयार करते हैं। 

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