इण्डिया स्टोनमार्ट का समापन समारोह : सुरक्षित खनन के साथ पर्यावरण और पारिस्थितिकी संतुलन पर भी ध्यान देना जरूरी, बागड़े ने पर्यावरण और पारिस्थितिकी संतुलन को प्राथमिकता में रखकर कार्य करने का किया आह्वान
पत्थरों का खनन होता है
बड़े उत्पादकों में राजस्थान के महत्व की चर्चा करते हुए कहा कि इस समय राजस्थान मे 81 प्रकार के पत्थरों का खनन होता है। इनमे से 57 का व्यावसायिक दोहन होता है।
जयपुर। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने पत्थर उद्योग और उससे जु़ड़े प्रसंस्करण में सुरक्षित खनन के साथ पर्यावरण और पारिस्थितिकी संतुलन को प्राथमिकता में रखकर कार्य करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि राजस्थान पत्थरों के खनन में ही नहीं उनकी विविधता और निर्यात में भी देश में अग्रणी है। उन्होंने ’इण्डिया स्टोनमार्ट 2026‘ को पत्थर उद्योग और इससे जुड़े शिल्प निर्माण क्षेत्र, उद्यमिता की भविष्य की संभावनाओं के द्वार खोलने वाला बताया। राज्यपाल बागडे ’इण्डिया स्टोनमार्ट 2026‘ के समापन समारोह में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पत्थर उद्योग खनन में सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करना केवल नीति का विषय नहीं, बल्कि एक परिपक्व उद्योग की नैतिक जिम्मेदारी भी है। इस मार्ट के आयोजन का अर्थ ही है-राजस्थान के पाषाण वैभव से जुड़े विचार का वैश्विक प्रसार। उन्होंने कहा कि भारत के कुल पत्थरों के खनन और प्रंसस्करण राजस्थान का 70 प्रतिशत योगदान है। उन्होंने संगमरमर, ग्रेनाइट और बलुआ पत्थर के सबसे बड़े उत्पादकों में राजस्थान के महत्व की चर्चा करते हुए कहा कि इस समय राजस्थान मे 81 प्रकार के पत्थरों का खनन होता है। इनमे से 57 का व्यावसायिक दोहन होता है।
राज्यपाल ने पत्थर खनन से जुड़ी उद्यमशीलता और औद्योगिक विकास की संभावनाओं पर सभी स्तरों पर कार्य किए जाने का आह्वान किया। उन्होंने आयोजन स्थल पर विभिन्न स्टॉल में प्रदर्शित पत्थरों के शिल्प-सौंदर्य और निर्माण कार्यों में उनकी उपयोगिता का अवलोकन करते हुए कहा कि भारतीय पत्थर-उद्योग ने विश्वभर में अब अपनी विशिष्ट पहचान अब स्थापित कर ली है। बागडे ने कहा कि पाषाण निर्मित दुर्ग-किले महलों, मंदिरों, हवेलियों से लेकर आधुनिक संस्थानों और सार्वजनिक स्थलों पर पत्थरों के उपयोग ने निर्माण स्थायित्व, दृढ़ता और सामूहिक स्मृति को सदा जीवंत रखा है।

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