विधानसभा में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की अनुदान मांगों पर बहस : बीजेपी विधायक कालीचरण सराफ ने दिए अहम सुझाव, कहा- डॉक्टरों की पहली पोस्टिंग गांवों में अनिवार्य हो
गरीब मरीजों को समय पर इलाज नहीं
विधानसभा में बुधवार को चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की अनुदान मांगों पर बहस की शुरुआत करते हुए बीजेपी विधायक कालीचरण सराफ ने ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए कई अहम सुझाव दिए।
जयपुर। विधानसभा में बुधवार को चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की अनुदान मांगों पर बहस की शुरुआत करते हुए बीजेपी विधायक कालीचरण सराफ ने ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए कई अहम सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि नए नियुक्त डॉक्टरों की पहली पोस्टिंग कम से कम पांच साल के लिए दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में अनिवार्य की जानी चाहिए और इसके लिए उनसे 50 लाख रुपए का बॉन्ड भी भरवाया जाए। सराफ ने कहा कि प्रदेश में करीब 2500 सरकारी अस्पताल छोटे जिलों और गांवों में संचालित हैं, जहां 75 प्रतिशत मेडिकल स्टाफ के पद स्वीकृत हैं, लेकिन डॉक्टर, नर्सिंगकर्मी और पैरामेडिकल स्टाफ ग्रामीण क्षेत्रों में जाना नहीं चाहते।
राजनीतिक रसूख के कारण कई कर्मचारी शहरों में डेपुटेशन करवा लेते हैं, जिससे गांवों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होती हैं और गरीब मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता। उन्होंने सुझाव दिया कि शहरी भत्ता बंद कर ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत डॉक्टरों को विशेष ग्रामीण भत्ता दिया जाए। साथ ही गांवों में सेवा देने वाले डॉक्टरों के बच्चों को शहरों के अच्छे स्कूलों में प्रवेश की सुविधा भी सरकार उपलब्ध कराए। सराफ ने कहा कि प्रभावी ट्रांसफर पॉलिसी लाकर ही प्रदेशभर में संतुलित और मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था सुनिश्चित की जा सकती है।

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