नववर्ष के पहले पुष्य नक्षत्र पर मोती डूंगरी गणेश मंदिर में भव्य पंचामृत अभिषेक, श्रद्धालुओं ने भगवान गजानन के किए दर्शन
मंदिर परिसर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी
नववर्ष के पहले पुष्य नक्षत्र पर श्री मोती डूंगरी गणेश मंदिर में भगवान गणेश का भव्य पंचामृत अभिषेक आयोजित हुआ। 151 किलो दूध, 21 किलो बूरा, 21 किलो दही, शहद और 5.25 किलो घी से अभिषेक किया गया। भक्तों की भारी भीड़ जुटी, 1008 मोदक और राजभोग अर्पित किए गए।
जयपुर। नववर्ष के पहले और नक्षत्रों के राजा माने जाने वाले पुष्य नक्षत्र के पावन अवसर पर श्री मोती डूंगरी गणेश मंदिर में विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश का भव्य पंचामृत अभिषेक श्रद्धा और आस्था के साथ संपन्न हुआ। सुबह से ही मंदिर परिसर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भगवान गजानन के दर्शन किए।
पुष्य नक्षत्र के अवसर पर भगवान गणेश पर पंचामृत की पावन धार अर्पित की गई। पंचामृत 151 किलो दूध, 21 किलो बूरा, 21 किलो दही, शहद एवं सवा पाँच किलो घी से तैयार किया गया। अभिषेक के दौरान अथर्वशीर्ष के सामूहिक मंत्रोच्चार से संपूर्ण वातावरण भक्तिमय हो उठा। मंदिर प्रांगण फूलों की सुगंध, मोदकों की मिठास और भक्तों की आस्था से सराबोर नजर आया।
इस अवसर पर भगवान गणेश सिंदूरी चोले में सुसज्जित होकर भक्तों को दिव्य दर्शन दिए। अभिषेक के पश्चात भगवान को राजभोग में खीर और मालपुए का भोग अर्पित किया गया तथा 1008 मोदक समर्पित किए गए।
मंदिर के महंत कैलाश शर्मा ने बताया कि पुष्य नक्षत्र में भगवान गणेश की आराधना से सुख-समृद्धि, कार्य सिद्धि और विघ्नों का नाश होता है। इस विशेष धार्मिक आयोजन से गुलाबी नगरी जयपुर भक्ति के रंग में रंगी नजर आई।

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