मौसम विभाग से जुड़े डॉक्टर-अस्पताल : पूर्वानुमान से तुरंत अलर्ट, तैयारियां उसी अनुरूप
प्रचंड गर्मी में 1 लाख बीमार
जयपुर। राजस्थान में नौ तपा चल रहा है। ऐसे में लोगों के लू (हीटस्ट्रोक) लग रही है। शुक्र है अभी तक प्रदेश में इससे कोई मौत नहीं हुई है। इस बार लू से बचाव के लिए अस्पतालों में बर्फ के झूले यानी टेको तकनीक से हीटस्ट्रोक के मरीज आने पर इलाज की व्यवस्था की है। इसकी तैयारियां पिछली गर्मी में ही शुरू हो गई है। पीएचसी-सीएचसी और सब सेंटर पर स्टाफ को ट्रेनिंग दी। उन्हें बर्फ के आईस बॉक्स और तिरपाल उपलब्ध कराए हैं, ताकि मरीज के आते इस तकनीक से प्राइमरी इलाज के बाद मरीज गंभीर होने पर बड़े अस्पताल में रैफर हो सकें। मौसम विभाग से भी अस्पतालों को जोड़ दिया है, ताकि सुबह या एक दिन पूर्व ही मौसम का अनुमान अस्पताल प्रभारी को हो जाए, इसके अनुरूप वे अलर्ट रहें और स्टाफ को बेवजह छुट्टी पर ना भेजें।
यह 'टेको' तकनीक
हीटस्ट्रोक का मरीज अस्पताल पहुंचता है तो तुरंत उसे तिरपाल बिछाकर उस पर लिटाया जाता है। फिर बड़ी मात्रा में बर्फ के टुकड़े मरीज पर डाले जाते हैं। इसके बाद चारों कोनों से स्टाफ तिरपाल को उठाकर मरीज को बर्फ में झूलाता है, ताकि शरीर का तापमान तुरंत नियंत्रित हो सके। फिर मरीज को इसी तिरपाल और बर्फ के साथ लपटेकर एम्बूलेंस में बड़े अस्पताल रैफर किया जाता है या फिर स्थित ठीक होने पर वहीं इलाज किया जा रहा है।
दस हजार बैड्स अस्पतालों में रिजर्व रखे गए: डॉ. शर्मा
चिकित्सा विभाग के अतिरिक्त निदेशक डॉ.नरोत्तम शर्मा ने बताया कि प्रदेशभर में हीटवेव चिकित्सा प्रबन्धन के चलते 10 हजार बैड्स अस्पतालों में रिजर्व रखे गए हैं। एक लाख के करीब मरीज लू लगने की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंचे हैं। इनमें से 43 ही मरीजों को हीटस्ट्रोक से गंभीर मिले हैं। प्रदेश में कोई मौत नहीं हुई है। टेको तकनीक की सभी को ट्रेनिंग दी है।
सामान्य लक्षण: तेज बुखार या शरीर का तापमान बहुत बढ़ना, सिर दर्द और चक्कर आना, अत्यधिक कमजोरी या थकान, मुंह सूखना और तेज प्यास लगना, उल्टी या मितली महसूस होना, ज्यादा पसीना आना या अचानक पसीना बंद हो जाना, त्वचा लाल और गर्म होना, दिल की धड़कन तेज होना, हाथ-पैर में ऐंठन और बेहोशी आना है।
लू लगने पर मौत क्यों होती है...
ग्रामीण चिकित्सा के संयुक्त निदेशक डॉ.रघु यादव ने बताया कि सामान्य स्थिति में शरीर पसीना और त्वचा की रक्त वाहिकाएं गर्मी बाहर निकालती हैं, लेकिन अत्यधिक गर्मी में थमार्ेरेग्युलेशन सिस्टम फेल हो जाता है। इनके खराब होते ही कोशिकाएं सही काम नहीं कर पातीं और मरने लगती हैं। रक्त गाढ़ा होने लगता है। ब्लड प्रेशर गिर जाता है। अंगों तक ऑक्सीजन और पोषण नहीं पहुंचता। ब्रेन, किडनी, हॉर्ट, लीवर, फेफड़ों और आंतों तक पर्याप्त रक्त नहीं पहुंच पाता। रक्त वाहिकाएं लीक होने लगती हैं। ऊतकों में सूजन आती है। कई अंग एक साथ प्रभावित होते है, फैल्योर हो जाते हैं। खून के थक्के बनने लगते हैं।
ऐसे में मरीज गंभीर हो जाता है।
लू लगने पर तुरंत ये उपाय करें
व्यक्ति को ठंडी जगह पर लिटाएं, पानी, ओआरएस, नींबू पानी या छाछ पिलाएं, शरीर पर ठंडे पानी की पट्टियां रखें, भारी कपड़े ढीले करें, तेज धूप में दोबारा न जाने दें।

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