कागजों में सफाई, सड़कों पर गंदगी : मॉनिटरिंग के अभाव में शहर कचरे के ढेर में तब्दील, आयुक्त के आदेश के बाद भी मॉनिटरिंग की अनदेखी
निगम के दावों की खुल रही पोल
सफाई व्यवस्था बिगड़ती नजर आ रही। मुख्य मार्गों, कॉलोनियों और बाजारों में कई दिनों से कचरा नहीं उठने से दुर्गंध फैल रही। नगर निगम आयुक्त डॉ. गौरव सैनी के मॉनिटरिंग निर्देशों के बावजूद अधिकारी सक्रिय नहीं दिख रहे। नतीजतन कई वार्डों में कचरे के ढेर, जाम नालियां और अनियमित कचरा वाहन से लोगों में नाराजगी बढ़ रही।
जयपुर। शहर की सफाई व्यवस्था इन दिनों पटरी से उतरती नजर आ रही है। मुख्य मार्गों, कॉलोनियों, बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हुए हैं। हालात यह हैं कि कई स्थानों पर कई दिनों तक कचरा नहीं उठने से दुर्गंध फैल रही है और आमजन को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शहर की सफाई व्यवस्था की नियमित मॉनिटरिंग के लिए नगर निगम आयुक्त डॉ. गौरव सैनी के निर्देश पर जोन उपायुक्तों के साथ ही सफाई कार्य से जुड़े अधिकारियों को सुबह डेढ़ से दो घंटे मॉनिटरिंग करनी है लेकिन अधिकारियों ने आदेशों को हवा में उड़ा दिया है और शहर जगह-जगह गंदगी के ढ़ेर पर बैठा है। हालांकि आयुक्त डॉ. सैनी ने होली के पर्व पर स्पेशल टीमों का गठन करने के साथ ही स्वयं मध्य रात्रि को सफाई की मॉनिटरिंग के लिए करीब चार घंटे फील्ड में रहे।
जमीनी हकीकत आदेशों के विपरीत :
नगर निगम प्रशासन ने शहर को साफ-सुथरा रखने के लिए सफाई कर्मचारियों को नियमित कचरा उठाने और वार्ड स्तर पर निगरानी रखने के निर्देश दिए थे। इसमें वार्ड स्तर पर ओआईसी भी नियुक्त किए है। इसके तहत अधिकारियों को समय-समय पर निरीक्षण करने और व्यवस्था की मॉनिटरिंग के अभाव में जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। कई वार्डों में सफाई कर्मचारी समय पर नहीं पहुंच रहे हैं और कचरा वाहन भी नियमित रूप से नहीं आ रहे हैं, जिससे कचरा सड़कों और खाली प्लॉटों में जमा होता जा रहा है। नालियों के किनारे भी कचरे के ढेर लगे हुए हैं, जिससे नालियां जाम हो रही हैं और गंदगी का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। इससे लोगों में नाराजगी देखी जा रही है।
निगम के दावों की खुल रही पोल :
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नगर निगम समय-समय पर सफाई व्यवस्था को लेकर बड़े-बड़े दावे करता है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है। कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का स्थाई समाधान नहीं हो पा रहा। लोगों का कहना है कि यदि सफाई व्यवस्था की नियमित मॉनिटरिंग हो और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए तो हालात में सुधार संभव है।

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