कथा के दौरान श्रद्धालुओं को हुई भारी परेशानी, अव्यवस्थाओं के चलते बेहाल
व्यवस्था नहीं होने से श्रद्धालुओं को निराश ही लौटना पड़ा
जयपुर। श्री गोविंददेवजी मंदिर में शुरू हुई ‘नानी बाई रो मायरा’कथा के दौरान श्रद्धालुओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। पांड़ाल में बिना प्रवेश पत्र प्रवेश नहीं देने, पानी की माकूल व्यवस्था नहीं होने और बैठने की समुचित व्यवस्था नहीं होने से श्रद्धालुओं को निराश ही लौटना पड़ा। श्रद्धालु बड़े हर्ष के साथ कथा का श्रवण करने मंदिर आए थे, लेकिन कथा में अव्यवस्थाओं के चलते श्रद्धालु परेशान होते रहे। इधर, कथावाचक जया किशोरी ने बेटियों की स्वतंत्रता और परिवार में उनके सपनों के महत्व पर जोर देते हुए अभिभावकों से अपील की कि बेटियों की इच्छाओं और खुशियों को केवल शादी के बाद पूरा करने की सोच से बाहर निकलना चाहिए।
परिवारों में आमतौर पर बेटियों से कहा जाता है कि घूमना-फि रना, अपने शौक पूरे करना या कुछ नया सीखना शादी के बाद कर लेना। लेकिन जीवन की परिस्थितियां भविष्य में कैसी होंगी, इसका किसी को पता नहीं होता। ऐसे में बेटियों को उनके वर्तमान समय में ही खुलकर जीने और अपने सपने पूरे करने का अवसर मिलना चाहिए। बेटियां जब तक परिवार के साथ हैं, तब तक उन्हें अपने मन की इच्छाएं पूरी करने और जीवन का आनंद लेने का अवसर मिलना चाहिए। कथा में जया किशोरी ने बच्चों के संस्कार और धार्मिक शिक्षा का विषय भी उठाया। उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवनशैली के बीच बच्चों को भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और भगवान की कथाओं से जोड़ना बेहद आवश्यक है। कथा आगामी दिनों में भी जारी रहेगी, जिसमें श्रद्धालुओं की भारी भागीदारी देखने को मिल रही है।

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