हृदय रोगों को लेकर हुई मेडिकल सेमिनार, स्ट्रक्चरल इंडिया मास्टर क्लास-2026 में विशेषज्ञों ने दी जानकारी
दिल के 3डी डिजिटल ब्लूप्रिंट से हार्ट वॉल्व प्रोसीजर की प्लानिंग
जयपुर। अब हार्ट वॉल्व इंटरवेंशन केवल अनुभव के आधार पर नहीं बल्कि उन्नत 3डी डिजिटल तकनीक की मदद से पहले ही पूरी तरह योजनाबद्ध किया जा सकता है। इससे न केवल प्रोसीजर के परिणाम बेहतर मिल रहे हैं बल्कि जोखिमों का मूल्यांकन भी आसानी से किया जा सकता है। जयपुर में शुरू हुई दो दिवसीय नेशनल कॉन्फ्रेंस स्ट्रक्चरल इंडिया मास्टरक्लास-2026 में विशेषज्ञों ने ऐसी जानकारी दी। कॉन्फ्रेंस के कोर्स डायरेक्टर डॉ. प्रशांत द्विवेदी और डॉ. प्रेम रतन देगावत ने बताया कि कॉन्फ्रेंस के पहले दिन विशेषज्ञों ने हार्ट वाल्व इंटरवेंशन की आधुनिक तकनीकों पर विस्तृत जानकारी दी।
प्रसिद्ध इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. समीन शर्मा ने स्ट्रक्चरल हार्ट विशेषज्ञता में आई नवीनतम तकनीकों और रिसर्च के बारे में जानकारी दी। हैदराबाद से आए डॉ. राजीव मेनन ने बताया कि इस तकनीक में मरीज के सीटी स्कैन का 3डी एनालिसिस कर हृदय की संरचना का विस्तृत डिजिटल मॉडल तैयार किया जाता है।
इसके आधार पर वाल्व का सही आकार, उसे लगाने की उपयुक्त स्थिति, कैथेटर का सुरक्षित मार्ग और संभावित जटिलताओं का पहले ही आंकलन किया जा सकता है।
ट्रांस कैथेटर से ही इंप्लांट होगा कृत्रिम वॉल्व : यूएसए से आए डॉ. समीन शर्मा ने बताया कि वॉल्व का अब तक ओपन सर्जरी से ही इलाज संभव था। ऐसे मामलों में दूसरी बड़ी सर्जरी का जोखिम ज्यादा होता है जबकि वॉल्व इन वॉल्व प्रोसीजर में कैथेटर के जरिए नया वॉल्व पुराने वॉल्व के भीतर ही फिट कर दिया जाता है। इससे मरीज को कम दर्द और रिकवरी तेजी से होती है।

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