ग्रामीण क्षेत्रों की अनदेखी पर घनश्याम मेहर का सरकार पर तीखा हमला, किसानों की जमीन प्रभावित होने और स्टील उद्योग न लगाने का आरोप
आमजन को भारी परेशानी उठानी पड़ रही
बजट बहस के दौरान कांग्रेस विधायक घनश्याम मेहर ने सरकार पर ग्रामीण उपेक्षा का आरोप लगाया। उन्होंने अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी, पानी-बिजली-सड़क योजनाओं की कमी और सीमित हैंडपंप स्वीकृति पर सवाल उठाए। टोडाभीम बस स्टैंड अधूरा होने का मुद्दा भी उठाया।
जयपुर। बजट पर बहस के दौरान कांग्रेस विधायक घनश्याम मेहर ने राज्य सरकार पर ग्रामीण इलाकों की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेश के गांव बदहाल स्थिति में हैं। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में न डॉक्टर उपलब्ध हैं और न ही आवश्यक स्टाफ, जिससे आमजन को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। मेहर ने तंज कसते हुए कहा कि जनता समझ नहीं पा रही है कि तथाकथित डबल इंजन सरकार प्रदेश को किस दिशा में ले जा रही है।
उन्होंने बजट को भी निराशाजनक बताया। मेहर के अनुसार बजट में नए कॉलेज या अस्पताल खोलने की ठोस योजना नजर नहीं आती और न ही पानी, बिजली व सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं पर गंभीर पहल दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विधायक को केवल छह हैंडपंप और तीन ट्यूबवेल की स्वीकृति देना व्यावहारिक नहीं है, क्योंकि एक विधानसभा क्षेत्र का दायरा बहुत बड़ा होता है। उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार के समय हर विधायक को 100 हैंडपंप दिए जाते थे, जबकि वर्तमान सरकार में स्वीकृत हैंडपंप भी समय पर नहीं लगाए जा रहे।
मेहर ने सरकार पर केवल घोषणाएं करने का आरोप लगाते हुए कहा कि टोडाभीम में पूर्व में घोषित बस स्टैंड आज तक जमीन पर नहीं उतर पाया। उन्होंने कहा कि जितने संसाधन हों, उतनी ही घोषणा करनी चाहिए, वरना जनता भ्रमित होती है।
करौली क्षेत्र का जिक्र करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि पहाड़ी इलाकों में बसे लगभग 40 गांवों के बीच आयरन अयस्क की लीज दी जा रही है और खनन कर खनिज बाहर भेजने की तैयारी है। मेहर ने कहा कि इससे किसानों की जमीन प्रभावित होगी, जबकि प्रदेश में स्वयं कोई स्टील उद्योग स्थापित नहीं किया जा रहा।

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