गोविन्द डोटासरा का भाजपा सरकार पर आरोप, कहा- भाजपा राजस्थान में 7,352 स्कूल बंद कर बच्चों और रोजगार पर खतरा पैदा कर रही
बेहद चिंताजनक और दुर्भाग्यपूर्ण
गोविन्द डोटासरा ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार राजस्थान में 7,352 स्कूल बंद और मर्ज करने की तैयारी में। डोटासरा ने इसे आरटीई नियमों का उल्लंघन और बच्चों के शिक्षा अधिकार और 20,000 से अधिक सरकारी रोजगार पर खतरा। उन्होंने नामांकन घटने और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा में बाधा के प्रति चेतावनी।
जयपुर। पीसीसी चीफ गोविन्द डोटासरा ने कहा है कि भाजपा सरकार राजस्थान में 7 हजार से अधिक स्कूलों बंद और मर्ज करने की तैयारी में है, जो बेहद चिंताजनक और दुर्भाग्यपूर्ण है।
डोटासरा ने कहा कि स्कूलें बंद करने के लिए अधिकारियों से जानकारी जुटाई जा रही है, ये फैसला सीधे-सीधे आरटीई नियमों की धज्जियां उड़ाने वाला है, जिसमें स्पष्ट प्रावधान है कि कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों को 1 किलोमीटर में प्राथमिक स्कूल और कक्षा 6 से 8 तक के बच्चों के लिए 3 किलोमीटर में उच्च प्राथमिक स्कूल होना कानूनन बाध्य है। स्कूलें बंद करना और रोजगार छीनना भाजपा की नीतिगत परंपरा बन गई है। 2013 से 2018 तक पूर्ववर्ती भाजपा सरकार ने भी मर्ज के नाम पर 20 हज़ार से अधिक स्कूलें बंद की थी। अब वही काम भाजपा की मौजूदा सरकार करने जा रही है। शिक्षा विभाग ने 7,352 ऐसी स्कूलों को बंद करने की योजना बनाई है, जिन प्राथमिक स्कूलों में बच्चों का नामांकन 0-14 और उच्च प्राथमिक स्कूलों में बच्चों का नामांकन 0–24 यानि 25 से कम हैं। भाजपा एक तरफ एनईपी 2020 का ढोंग रच रही है, वहीं दूसरी ओर स्कूलों पर ताले लगाकर बच्चों से शिक्षा का मूल अधिकार छीन रही है। इतना ही नहीं ये कदम 20 हजार से अधिक पद समाप्त कर रोजगार की संभावनाएं खत्म करने वाला होगा। हकीकत ये है कि प्रदेश में शून्य नामांकन वाली सिर्फ 96 स्कूलें हैं, पिछले 4 साल से सरकारी स्कूलों का नामांकन लगातार घटता जा रहा है। जहां कांग्रेस सरकार में 2021-22 में नामांकन 97 लाख से अधिक था, वो अब 2025-26 में घटकर 73 लाख रह गया है। नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने जा रहा है, ऐसे समय में भाजपा सरकार का दायित्व क्षमता अनुसार पर्याप्त शिक्षक लगाने, नामांकन बढ़ाने, गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा और बेहतर सुविधाएं देने का होना चाहिए। लेकिन इसके उलट स्कूलों को बंद करने की योजना बनाई जा रही है। ये सिर्फ प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि गरीब, ग्रामीण और वंचित बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ होगा है।

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