राजस्थान सरकार ने ठुकराई पंजाब की पानी रॉयल्टी मांग, मंत्री सुरेश रावत का पलटवार
पंजाब सरकार की हमें इस संबंध में कोई चिट्टी नहीं मिली
पंजाब द्वारा पानी के बकाया शुल्क की मांग को राजस्थान सरकार ने खारिज। जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने निराधार और चुनावी मुद्दा बताया। पुराने व अंतरराज्यीय जल समझौतों में रॉयल्टी का कोई प्रावधान नहीं। सरकार अपने अधिकारों पर कायम।
जयपुर। पंजाब सरकार द्वारा पानी के बकाया शुल्क की मांग को राजस्थान सरकार ने सख्ती से खारिज कर दिया है। जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे पूरी तरह निराधार और चुनावी एजेंडा करार दिया है।
रावत ने कहा कि पंजाब सरकार की हमें इस संबंध में कोई चिट्टी नहीं मिली है, अगर चिट्ठी मिलती है तो विधिक राय लेते हुए उस पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। रावत ने कहा कि वर्ष 1920 के समय भारत में ब्रिटिश सरकार का शासन था और उस दौरान हुए सभी समझौते उनके हितों को ध्यान में रखकर किए गए थे। उस समय रॉयल्टी का भुगतान पंजाब को नहीं, बल्कि ब्रिटिश सरकार को किया जाना था।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतरराज्यीय जल समझौतों 1955, 1959 और 1985 में कहीं भी पानी पर रॉयल्टी का उल्लेख नहीं है। ऐसे में पंजाब की ओर से की जा रही मांग पूरी तरह अनुचित है।
मंत्री रावत ने आगे कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान को “ब्रिटिश मानसिकता” से बाहर आना चाहिए और तथ्यों के आधार पर बात करनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि यह मुद्दा आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए उठाया जा रहा है और इससे जनता को गुमराह करने की कोशिश भी हो सकती है।
राजस्थान सरकार ने साफ कर दिया है कि इस तरह की मांगों का कोई औचित्य नहीं है और राज्य अपने अधिकारों पर कायम रहेगा। वहीं दूसरी ओर रावत ने यमुना का पानी राजस्थान लाने को लेकर कहा की डीपीआर फाइनल हो चुकी है अब सिर्फ इसमें पीने का पानी कहां कहाँ दिया जाएगा, इस पर हरियाणा और राजस्थान के बीच में सहमति बननी बाकी है।

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