पीएम विश्वकर्मा योजना में राजस्थान की शानदार उपलब्धि, ऋण स्वीकृति में देश में दूसरा स्थान
राजस्थान ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के क्रियान्वयन में राजस्थान ने देश में मजबूत पहचान बनाई है। ऋण स्वीकृति और वितरण में राज्य दूसरे स्थान पर रहा, जबकि टूलकिट वितरण और प्रशिक्षण में तीसरा स्थान मिला। स्वर्णकार, कुम्हार व मूर्तिकार जैसे ट्रेड्स में पंजीकरण में राजस्थान प्रथम रहा। कारीगरों को ई-कॉमर्स और ऑफलाइन बाजारों से जोड़कर उनकी आय बढ़ाई जा रही है।
जयपुर। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में राजस्थान ने देशभर में अपनी सशक्त पहचान बनाई है। ऋण स्वीकृति एवं वितरण के क्षेत्र में राजस्थान देश में दूसरे स्थान पर रहा है, जो राज्य सरकार के सुनियोजित प्रयासों और कारीगरों तक योजनाओं की मजबूत पहुंच को दर्शाता है। योजना के तहत राज्य का औसत ऋण टिकट साइज 87 हजार रुपए रहा है, जो कि राष्ट्रीय औसत 83 हजार रुपए से अधिक है। यह तथ्य कारीगरों की आर्थिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर दिए जा रहे सहयोग को दर्शाता है।
टूलकिट वितरण और कारीगरों के प्रशिक्षण के क्षेत्र में भी राजस्थान ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है और देश में तीसरा स्थान प्राप्त किया है। इससे कारीगरों की कार्यक्षमता, उत्पाद गुणवत्ता और रोजगार के अवसरों में निरंतर वृद्धि हो रही है। स्वर्णकार, हथौड़ा एवं टूलकिट निर्माता, कुम्हार तथा मूर्तिकार जैसे ट्रेड्स में सफल पंजीकरण की संख्या के आधार पर राजस्थान राज्य देश में प्रथम स्थान पर है। राज्य सरकार द्वारा कारीगरों को आधुनिक विपणन से जोड़ने की दिशा में भी प्रभावी कदम उठाए गए हैं। राजस्थान के कारीगरों को अमेजन, मीशो और फैब इंडिया जैसे प्रमुख ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है। साथ ही, ऑफलाइन विपणन के लिए दिल्ली हाट और रेलवे स्टेशनों पर भी उनके उत्पादों को प्रदर्शित एवं विक्रय की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इससे कारीगरों की आय बढ़ने के साथ-साथ उनकी पारंपरिक कला को राष्ट्रीय पहचान मिल रही है।

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