पश्चिम बंगाल चुनाव का जयपुर पर असर : लोकतंत्र की पुकार, ठहर गई रफ्तार ; उद्योग से घरों तक कारीगरों का संकट
जयपुर में 25 हजार पश्चिम बंगाल के लोग करते हैं काम
पश्चिम बंगाल में जारी चुनावों की गूंज अब राजस्थान की राजधानी जयपुर तक सुनाई दे रही। हालांकि यह असर राजनीतिक नहीं बल्कि आर्थिक और सामाजिक स्तर पर नजर आ रहा। शहर में कार्यरत करीब 25 हजार बंगाली श्रमिकों में से 60-65 फीसदी मतदान के लिए अपने गृह राज्य लौट गए।
जयपुर। पश्चिम बंगाल में जारी चुनावों की गूंज अब राजस्थान की राजधानी जयपुर तक सुनाई दे रही है। हालांकि यह असर राजनीतिक नहीं बल्कि आर्थिक और सामाजिक स्तर पर नजर आ रहा है। शहर में कार्यरत करीब 25 हजार बंगाली श्रमिकों में से 60-65 फीसदी मतदान के लिए अपने गृह राज्य लौट गए हैं। इसके चलते उद्योग-धंधों और सेवा क्षेत्र की रफ्तार धीमी पड़ गई है। जैम्स एंड ज्वैलरी इंडस्ट्री में प्रोडक्शन सुस्त हो गया है। वहीं टेक्सटाइल सेक्टर में कटिंग और सिलाई के काम प्रभावित हुए हैं। घरेलू कामकाज जैसे साफ-सफाई और खाना बनाने में भी लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वेडिंग सीजन के बीच टेंट, फ्लॉवर डेकोरेशन और इवेंट मैनेजमेंट से जुड़े कामों में बंगाली कारीगरों की अनुपस्थिति साफ दिख रही है। एडवांस पेमेंट के बावजूद कारीगर नहीं मिल रहे हैं, जिससे आयोजनों पर असर पड़ रहा है।
यहां ज्वैलरी बनाने का काम कर रहे चांदपोल के जाट के कुएं का रास्ता निवासी सनत वक्त ने बताया कि उनके यहां काम करने वाले कई कारीगर वोट डालने गए हैं और वे खुद भी दूसरे चरण यानी 29 अप्रैल को मतदान के लिए जाएंगे। क्योंकि काम के साथ वोट देना भी जरुरी है। वहीं कुचबिहार निवासी हाल जयपुर में रहने वाली माधवी ने बताया कि अपने साथियों के साथ समूह में गांव गई हैं। ताकि लोकतंत्र में अपनी भागीदारी निभा सकें। कारीगरों की कमी के कारण ऑर्डर समय पर पूरा करना भी मुश्किल हो गया है। जिससे एक्सपोर्ट पर खासा असर आया है। मई में इन श्रमिकों के लौटने के बाद ही स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है।
वे डिंग इवेंट्स में फ्लोवर डकोरेशन, टेंट डेकोरेशन सहित अन्य इंवेट्स में डेकोरेशन काम बंगाली कारीगर ही करते हैं। इन दिनों चल रहे शादी-ब्याह के सीजन में एडवांस पैमेंट करने के बाद ही कारीगर नहीं मिल रहे हैं, क्योंकि सभी चुनावों में वोट ड़ालने के लिए पश्चिम बंगाल गए हैं।
इवेंट्स कंपनी संचालको का कहना है कि राजनीतिक दल उन्हें पैमेंट कर मतदान करने के लिए वहां बुला रहे हैं। उन्हें एसआईआर मैं नाम कटने का भी भय दिखा रहे हैं। शादी-ब्याह में हलवाई के साथ मसालची का ज्यादातर काम भी यहीं करते हैं, अभी
दिक्कत आ रही है।
-रास बिहारी शर्मा, प्रदेशाध्यक्ष, राजस्थान टैंट
डीलर्स किराया व्यावसायी समिति।
जै म्स एंड ज्वैलरी में कटिंग, पॉलिशिंग, पैकेजिंग के साथ माल की साफ सफाई का मुख्य काम फुर्तीले तरीके से बंगाली कारीगर करते हैं। चुनाव के कारण सभी मतदान के लिए अपने अपने गांव चले गए हैं। टैक्सटाईल उद्योग में कटिंग, स्टिचिंग के काम में आई रुकावट से ऑर्डर पूरा करना मुश्किल हो गया है। टैक्सटाईल एक्सपोर्ट मार्केट में समय पर सप्लाई करना चुनौती बन गया है।
-सुरेश अग्रवाल,
अध्यक्ष, फोर्टी।

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