विश्व पुस्तक और कॉपीराइट दिवस : जेकेके लाइब्रेरी बनी आर्ट लवर्स का सबसे बड़ा ठिकाना, किताबों में 140 साल का इतिहास
रंगमंच की संवेदनाएं और धरोहर का नया सफर
कला, इतिहास और संस्कृति के दीवाने हैं तो जेकेके की लाइब्रेरी आपके लिए किसी जादुई दुनिया से कम नहीं। यहां 20,000 से अधिक किताबों के बीच तीन ऐसी कृतियां सामने आई हैं, जो कलाकारों, शोधार्थियों और आर्ट लवर्स के लिए खजाने से कम नहीं हैं।
जयपुर। अगर आप कला, इतिहास और संस्कृति के दीवाने हैं तो जेकेके की लाइब्रेरी आपके लिए किसी जादुई दुनिया से कम नहीं। यहां 20,000 से अधिक किताबों के बीच तीन ऐसी कृतियां सामने आई हैं, जो कलाकारों, शोधार्थियों और आर्ट लवर्स के लिए खजाने से कम नहीं हैं। डेयपोर एग्ज़ीबिशन 1883 के मेमोरियल्स, ट्रिस्ट विद ट्रेडिशन और राजस्थान रीडिस्कवर्ड: जर्नी थ्रू द हेरिटेज- ये तीनों पुस्तकें कला, रंगमंच और विरासत को अलग-अलग दृष्टिकोण से सामने लाती हैं। यह लाइब्रेरी सिर्फ किताबों का संग्रह नहीं, एक जीवंत अनुभव है, जहां हर पन्ना इतिहास सुनाता है और हर कोना रचनात्मकता को जन्म देता है।
डेयपोर एग्जीबिशन 1883 के मेमोरियल्स
यह पुस्तक 1883 में जेयपोर प्रदर्शनी की ऐतिहासिक झलक प्रस्तुत करती है। थॉमस एच. हेंडली द्वारा तैयार की गई इस कृति में भारतीय कला, शिल्प और सांस्कृतिक धरोहर का विस्तृत दस्तावेजीकरण किया गया है। चार खंडों में प्रकाशित इस पुस्तक में रंगीन क्रोमो-लिथोग्राफ, दुर्लभ फोटोग्राफ और कलाकृतियों का अनूठा संग्रह शामिल है। विशेष रूप से चौथे खंड में मुगल सम्राट अकबर के रज्मनामा से जुड़े चित्र इसे और भी खास बनाते हैं।
ट्रिस्ट विद ट्रेडिशन
यह पुस्तक लघु नाटकों के माध्यम से समाज, संस्कृति और मानवीय संबंधों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया है। चित्रकूट का राही सहित कई नाटकों में जीवन, आस्था और संघर्ष की गहराई दिखाई देती है। 2003-04 की लघु नाट्य लेखन प्रतियोगिता की पुरस्कृत रचनाओं पर आधारित यह संग्रह उभरते नाटककारों को मंच देता है।
राजस्थान रीडिस्कवर्ड : जर्नी थ्रू द हेरिटेज
इस पुस्तक प्रदेश के 18 जिलों के ऐतिहासिक स्मारकों, उनकी वास्तुकला और सांस्कृतिक महत्व का विस्तार से वर्णन किया गया है। लोक-नृत्य, लोक-संगीत और ख्याल-तमाशा जैसी परंपराओं को शामिल कर यह कृति राज्य की जीवंत संस्कृति को सामने लाती है।
लाइब्रेरी में 20, 000 से अधिक किताबों का विशाल संग्रह है, जिसमें आर्ट,लोक कला, संगीत, नाटक, मिनिएचर पेंटिंग्स से जुड़ी दुर्लभ सामग्री शामिल है। यहां पर परीक्षा की तैयारियां करने वाले बच्चे आते रहते है। -अनुराधा गोगिया (जेकेके अति. महानिदेशक)
यह स्थान पुस्तकालय को एक साधारण पठन कक्ष से आगे बढ़ाकर चिंतन और आत्मबोध का केंद्र बना हुआ है, जहां ज्योतिष, दर्शन और वास्तुकला एक साथ साकार होते हैं।
-डॉ कल्याण प्रसाद वर्मा (साहित्यकार)
आज जब शहर में अच्छे और शांत माहौल के पुस्तकालयों की कमी महसूस होती है ऐसे में जेकेके एक अच्छा विकल्प है।
-नवल पांडेय (लेखक)
20000 से अधिक किताबें यहां सिर्फ संग्रह नहीं, बल्कि सृजन की ऊर्जा है, जहां पाठक समय स्मृति और संस्कृति से गहराई से संवाद करता है।
-गुजन शर्मा (युवा लेखिका)
2015 से 2021 के बीच हुए नवीनीकरण के बाद स्थिति बदली- लाइब्रेरी में नए सेक्शन, हजारों किताबें, डिजिटलाइजेशन, वाई-फाई और बेहतर सुविधाएं जोड़ी गईं, साथ ही पूरे केंद्र को फिर से सांस्कृतिक गतिविधियों का सक्रिय मंच बनाने की कोशिश हुई।
-डॉ अजय अनुरागी (वरिष्ठ व्यंग्यकार)

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