प्रदेश के निकायों में 17.19 करोड़ के गड़बड़-घोटाले उजागर : सुविधा क्षेत्र की भूमि नहीं छोड़ी, समतुल्य राशि भी नहीं वसूली
स्थानीय निधि अंकेक्षण विभाग की रिपोर्ट में खुलासा
स्थानीय निधि अंकेक्षण विभाग की 2024-25 रिपोर्ट में प्रदेश के नगर निकायों में 17.19 करोड़ रुपए की वित्तीय अनियमितताएं उजागर हुईं। भूमि सुविधा क्षेत्र, विकास शुल्क और अन्य करों की वसूली न होने से राजस्व नुकसान हुआ। प्रतापगढ़, कुशलगढ़, बड़ी सादड़ी, निम्बाहेड़ा सहित कई निकायों में लाखों रुपए बकाया पाए गए।
जयपुर। प्रदेशभर के नगर निगमों, नगर परिषदों और नगर पालिकाओं में 17.19 करोड़ रुपए के वित्तीय गड़बड़-घोटाले सामने आए हैं। यह खुलासा स्थानीय निधि अंकेक्षण विभाग की वर्ष 2024-25 की लेखा प्रतिवेदन में हुआ, जिसे हाल ही में विधानसभा में प्रस्तुत किया गया।
रिपोर्ट के अनुसार कई निकायों ने नियमों के अनुरूप एकल पट्टा प्रकरणों में 5 प्रतिशत भूमि सुविधा क्षेत्र के रूप में नहीं छोड़ी और न ही उसके बदले समतुल्य राशि की वसूली की। इससे निकायों के खजाने को सीधा नुकसान हुआ तथा संबंधित निजी फर्मों/व्यक्तियों को लाभ पहुंचाया गया। लेखा प्रतिवेदन में यह भी सामने आया कि कई निकायों ने विकास शुल्क, लीज राशि, पुनर्गठन शुल्क, भवन निर्माण शुल्क, विज्ञापन शुल्क और नगरीय विकास कर की वसूली नहीं की। कुछ मामलों में वैध दस्तावेजों के बिना पट्टे जारी किए गए तथा भूमि की गणना कम दर्शाकर निजी व्यक्तियों को लाभ पहुंचाया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, इन अनियमितताओं से निकायों के राजस्व को भारी नुकसान हुआ है।
इन निकायों ने नहीं की वसूली :-
-- प्रतापगढ़ नगर पालिका ने 46.20 लाख रुपए की राशि नहीं वसूली।
-- कुशलगढ़ पालिका (बांसवाड़ा) ने 12.38 लाख रुपए की वसूली नहीं की।
-- बड़ी सादड़ी नगर पालिका ने 10.31 लाख रुपए नहीं वसूले।
-- निम्बाहेड़ा नगर पालिका ने 8.23 लाख रुपए की राशि नहीं ली।
आंतरिक विकास शुल्क भी नहीं वसूला :-
-- कुशलगढ़ में 39.18 लाख रुपए का आंतरिक विकास शुल्क बकाया रहा।
-- आमेट नगर पालिका ने 28.84 लाख रुपए की वसूली नहीं की।
-- फतह नगर (सनवाड़) में 76.79 लाख रुपए तथा
भींडर में 43.53 लाख रुपए का आंतरिक विकास शुल्क नहीं वसूला गया।

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