जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2026 में कार्तिकेय वाजपेयी पेश करेंगे अपना पहला उपन्यास ‘द अनबिकमिंग’
जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में ‘द अनबिकमिंग’ पर विशेष सत्र
जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में कार्तिकेय वाजपेयी के प्रथम उपन्यास ‘द अनबिकमिंग’ पर विशेष सत्र होगा, जिसमें पहचान, आत्मचिंतन और प्रामाणिकता पर संवाद किया जाएगा।
जयपुर। दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित साहित्यिक आयोजनों में शुमार जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल, कार्तिकेय वाजपेयी की पहली पुस्तक ‘द अनबिकमिंग’ परएक विशेष सत्र में प्रस्तुत करेगा। यह सत्र वाजपेयी की जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में पहली उपस्थिति होगी, जिसमें उनके उपन्यास को अंतरराष्ट्रीय पाठकों, लेखकों और विचारकों के सामने औपचारिक रूप से प्रस्तुत किया जाएगा। इस बातचीत में वरिष्ठ पत्रकार संजय पुगलिया शामिल होंगे और सत्र का संचालन पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया की प्रकाशन निदेशक मिली ऐश्वर्या करेंगी।
‘द अनबिकमिंग’ अपनी आत्ममंथनकारी शैली और दार्शनिक दृष्टि के लिए चर्चा में है। उपन्यास में पहचान, महत्वाकांक्षा और आत्मिक स्पष्टता जैसे प्रश्नों को गहराई से टटोला गया है। महामहिमदलाई लामा की प्रस्तावना से सुसज्जित यह पुस्तक ध्यान, खेल और आत्म-चिंतन की लंबी साधना का परिणाम है और भारतीय कथा साहित्य में एक नए विचारशील स्वर को सामने लाती है।
जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में वाजपेयी उन अनुभवों और विचारों को साझा करेंगे, जिनसे इस पुस्तक की रचना संभव हुई। चर्चा के केंद्र में मार्गदर्शन, अपेक्षाएँ और विरासत में मिली पहचान को पीछे छोड़कर प्रामाणिकता की खोज जैसे विषय होंगे। संजय पुगलिया इस बातचीत को सांस्कृतिक और सार्वजनिक जीवन के व्यापक परिप्रेक्ष्य से जोड़ेंगे।
पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया द्वारा प्रकाशितद अनबिकमिंगसिद्धार्थ, एक प्रसिद्ध क्रिकेटर, और उसके गुरु अजय के बीच विकसित होते रिश्ते की कहानी है। यह कथा बाहरी सफलता और आंतरिक संतोष के बीच के तनाव को उजागर करती है और आधुनिक जीवन में स्थिरता और जागरूकता की परिवर्तनकारी भूमिका पर विचार करती है।
अपने उपन्यास के बारे में लेखक कार्तिकेय वाजपेयी ने कहा,“द अनबिकमिंग’ एक लंबी आत्म-परीक्षा और ध्यान की यात्रा से उपजा है। इसे जयपुर लिटरेचरफेस्टिवल में प्रस्तुत करना—जहाँ संवाद स्वाभाविक है और जिज्ञासा को सम्मान मिलता है—ऐसा महसूस होता है मानो यह पुस्तक अपने स्वाभाविक पाठकों के बीच घर लौट आई हो,ऐसे साहित्यिक महाकुंभ में अपनी किताब पर संवाद करने को मैं उत्सुक हूँ।”
दिल्ली-स्थित वकील, पूर्व राज्य-स्तरीय क्रिकेटर और विभिन्न ध्यान साधनाओं के अनुभवी अभ्यासकर्ता वाजपेयी ने अपने जीवन के अनुभवों से इस कृति को आकार दिया है। ‘द अनबिकमिंग’ उनका प्रथम उपन्यास है, जो आत्म-चिंतन और जागरूकता पर केंद्रित एक नए, चिंतनशील साहित्यिक स्वर के आगमन का संकेत देता है।
यह सत्र एक आत्मीय और रोचक संवाद के रूप में सामने आएगा, जो श्रोताओं को ऐसी पुस्तक से परिचित कराएगा जो उपलब्धि और ‘और अधिक बनने’ की निरंतर दौड़ पर ठहरकर प्रश्न करती है। यह संवाद पाठकों को ‘जो पहले से है, उसी में लौटने’ की संवेदनशील और गहरी यात्रा का आमंत्रण देगा।

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