एट्रियल फिब्रिलेशन मरीजों में स्ट्रोक रोकथाम पर जोर, एमजीएमसीएच–फाइज़र की नई पहल
उच्च जोखिम वाले मरीजों के प्रबंधन जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा
जयपुर। एट्रियल फिब्रिलेशन (एएफ) के मरीजों में स्ट्रोक की रोकथाम और एंटीकोआगुलेशन (खून पतला करने वाली दवाओं) के सुरक्षित एवं प्रभावी उपयोग को बढ़ावा देने के लिए फाइज़र ने महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (एमजीएमसीएच), जयपुर के साथ साझेदारी की है। एसीई-केयर नेटवर्क पहल के तहत आयोजित वैज्ञानिक शैक्षणिक कार्यक्रम में 100 से अधिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य अस्पताल-स्तर पर एंटीकोआगुलेशन स्टीवर्डशिप को मजबूत करना, उपचार प्रोटोकॉल में एकरूपता लाना और विभिन्न विशेषज्ञताओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना रहा। विशेषज्ञों ने एएफ मरीजों में स्ट्रोक की रोकथाम, पोस्ट-एसीएस/पीसीआई उपचार, छूटे हुए एएफ की पहचान, वेनस थ्रोम्बोएम्बोलिज्म और उच्च जोखिम वाले मरीजों के प्रबंधन जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की।
फाइज़र के मेडिकल अफेयर्स प्रमुख डॉ. पंकज गुप्ता ने कहा कि साक्ष्य-आधारित उपचार और विशेषज्ञों के समन्वित प्रयासों से स्ट्रोक का जोखिम कम किया जा सकता है। वहीं एमजीयूएमएसटी के प्रो-वाइस चांसलर डॉ. वी.के. कपूर ने कहा कि यह पहल मरीजों की सुरक्षा, उपचार की गुणवत्ता और अस्पतालों में मानकीकृत एंटीकोआगुलेशन प्रबंधन को मजबूत करेगी। विशेषज्ञों के अनुसार भारत में एट्रियल फिब्रिलेशन के करीब 79 लाख मरीज हैं और इनमें सामान्य लोगों की तुलना में स्ट्रोक का खतरा तीन से पांच गुना अधिक होता है। ऐसे में समय पर पहचान, जोखिम-आधारित उपचार और नियमित फॉलो-अप अत्यंत आवश्यक है।

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