राजस्थान के कॉलेजों-विश्वविद्यालयों में साढ़े बारह लाख से ज्यादा जेन-जी, छात्रसंघ चुनाव न होने से शिक्षा परिसरों में बेचैनी का आलम
अकादमिक कैलेंडर से हटाया कॉलम
जयपुर। प्रदेश की करीब साढ़े बारह लाख से ज्यादा जेन-जी पिछले तीन साल से छात्रसंघ चुनाव में अपने मताधिकार से वंचित हैं। इस साल तो कॉलेज शिक्षा आयुक्तालय के जारी किए अकादमिक कैलेण्डर में छात्रसंघ चुनाव का जिक्र तक नहीं किया। आयुक्तालय ने कैलेण्डर में छात्रसंघ चुनाव का कॉलम तक हटा दिया, जबकि पूर्व में छात्रसंघ चुनाव के कॉलम में छात्रसंघ चुनाव की तिथि या स्थगित लिखा हुआ होता था। प्रदेश में अन्तिम बार छात्रसंघ चुनाव 2022 में हुए थे, तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने विधानसभा के चुनावी वर्ष 2023 में छात्रसंघ चुनाव नहीं कराए। इसके बाद आई भाजपा सरकार ने भी छात्रसंघ चुनाव कराने में रूचि नहीं दिखाई, लेकिन राजस्थान की जेन-जी अब छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर सरकार से आर-पार के मूड़ में हैं।
प्रदेश में छात्रसंघ चुनाव नहीं होने से छात्र हो रहे हैं अब आंदोलित, कह रहे : वादा किया था तो अब उसे निभाओ
राज्य में 2004 में भी स्थगित हो गए थे, छात्रसंघ चुनाव
चुनाव में अत्यधिक खर्चा होने,हिंसा की घटनाएं होने पर राज्य सरकार ने 2004 में छात्रसंघ चुनाव पर रोक लगा दी थी। लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों के आधार पर प्रदेश में 2010 में छात्रसंघ चुनाव फिर से शुरू हुए।
बिना लोकतंत्र कैसी उच्च शिक्षा : युवा
महाराजा कॉलेज के रघुवीर चौधरी और कानोड़िया कॉलेज की छात्रा पिंकी का कहना है कि छात्रसंघ चुनाव तो होने ही चाहिए। महारानी कॉलेज से बीए कर रही अनुराधा मीणा ने बताया कि स्कूल में सोचते थे कि कॉलेज जाएंगे तो चुनाव में वोट डालेंगे, लेकिन कॉलेज में प्रवेश के बाद से ही छात्रसंघ चुनाव बंद हैं।
जब तक छात्रसंघ चुनाव की घोषणा नहीं होंगी, तब तक मेरा आमरण अनशन जारी रहेगा। सरकार ने आरयू गेट पर चल रहे आमरण अनशन से हटाकर एसएमएस के आईसीयू में भर्ती करा दिया, लेकिन जब तक लिखित में कागज नहीं आएगा, तब तक अनशन जारी रहेगा। हम चाहते है हर विश्वविद्यालय और हर कॉलेज में युवाओं के लोकतंत्र की बहाली हो।
छात्र नेता राजस्थान विश्वविद्यालय
छात्रसंघ चुनाव नहीं होने से सरकार छात्र हितों को कुचल रही हैं, देश और दुनिया में जेन-जी के हितों का ध्यान रखा जा रहा है, लेकिन राजस्थान सरकार युवाओं की आवाज को कुंद करना चाहती हैं।
-प्रो. बनय सिंह, शिक्षक नेता, जयपुर
छा त्रसंघ चुनाव सरकार के संज्ञान में हैं, बातचीत करेंगे, सभी से बातचीत कर चुनाव होंगे। छात्रसंघों के चुनाव कांग्रेस के समय रोक दिए गए थे क्योंकि उन्हें चुनाव से पहले हार का डर था। उन्हें चुनाव नहीं रोकने चाहिए थे।
-प्रेमचन्द्र बैरवा, उप मुख्यमंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री
आज प्रदेश का हर युवा छात्रसंघ चुनाव की पुरजोर मांग कर रहा है। विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के युवाओं की आवाज को दबाना और उनके लोकतांत्रिक अधिकार से उन्हें वंचित रखना इस सरकार की अदूरदर्शिता को दशार्ता है।
-टीकाराम जूली, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष
मैं ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है। छात्रसंघ चुनाव लाजिमी होने चाहिए। ये चुनाव राजनीतिक और सामाजिक उत्तरदायित्व के निर्माण का सशक्त माध्यम रहा है। छात्रसंघों के चुनाव लोकतंत्र की प्रारंभिक पाठशाला है। ये चुनाव रोकना ठीक नहीं।
-मनीष यादव, विधायक शाहपुरा एवं पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष राज. विश्व.

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