नि:शुल्क दवा योजना में लाभ लेने में सिर्फ 6 जिलों की जनता जागरुक : बाकी सब फिसड्डी, छोटे जिलों में कम उपयोग

छोटे जिले, लेकिन खर्च ज्यादा

नि:शुल्क दवा योजना में लाभ लेने में सिर्फ 6 जिलों की जनता जागरुक : बाकी सब फिसड्डी, छोटे जिलों में कम उपयोग

राजस्थान में नि:शुल्क दवा योजना का लाभ मुख्यतः छह जिलों- अजमेर, अलवर, बीकानेर, जयपुर, जोधपुर और कोटा में केंद्रित, 59% खर्च हुआ। 2025 में कुल 1459 करोड़ में से 866 करोड़ यहीं खर्च हुए। जयपुर अकेले 27% हिस्सेदारी के साथ सबसे आगे रहा।

जयपुर। राजस्थान में नि;शुल्क दवा योजना का लाभ लेने में केवल छह जिलों के लोग जागरुक हैं। सबसे ज्यादा लाभ लेने वाले जिलों में अजमेर, अलवर, बीकानेर, जयपुर, जोधपुर, कोटा शामिल हैं। बाकी जिलों में इस योजना का फायदा लोग तुलनात्मक रूप से काफी कम उठा रहे हैं। हालांकि, सभी जिलों में सभी दवाईयों की आपूर्ति हो रही है।

प्रदेश में नि:शुल्क दवाईयों की आपूर्ति चिकित्सा विभाग के राजस्थान मेडिकल सर्विस कॉरपोरेशन लिमिटेड की ओर से की जाती है। राजस्व रिकॉर्ड के मुताबिक प्रदेश में 41 जिले हैं, लेकिन 2025 तक चिकित्सा विभाग ने प्रदेश को 34 जिलों में बांटकर दवाईयों की आपूर्ति, आवंटन और वितरण खर्च का हिसाब बनाया। जिसमें चौकान्ने वाले आंकड़े आए हैं। प्रदेश में वर्ष 2025 में कुल 1459.37 करोड़ रुपए नि:शुल्क दवा आपूर्ति पर खर्च किए। इनमें से 6 जिलों में 59.41 फीसदी यानी 866.83 करोड़ रुपए का खर्च हुए। बाकी 28 जिलों में केवल 592.54 करोड यानी 41 फीसदी पैसे की दवाईयां ही मरीजों को बंटी। 

सबसे ज्यादा जयपुर, सबसे कम डीडवाना-कुचामन में खर्च :

प्रदेश में सबसे ज्यादा नि:शुल्क दवा पर खर्च जयपुर जिले में हो रहा है। अकेले जयपुर में करीब 395 करोड़ रुपए की दवाईयां अस्पतालों में खप रही है। यानी कुल दवा खर्च का करीब 27 फीसदी खर्चा अकेले जयपुर में हो रहा है। हालांकि जयपुर में बड़ा खर्च का कारण प्रदेशभर से यहां के बडे अस्पतालों में रैफरल होकर मरीज का आना भी है। इसके बाद  बीकानेर में 157.23 करोड़, जोधपुर में 115.19 करोड़, अजमेर में 88.54 करोड़, कोटा में 70.08 करोड़ खर्च हुए हैं, वहीं सबसे कम खर्च डीडवाना-कुचामन जिलें में 4.94 करोड़ हुआ। 10 करोड़ से कम दवा खर्च वाले जिलों में कोटपूतली-बहरोड़ में 7.14 करोड़, खैरथल-तिजारा में 9.12 करोड़ ब्यावर में 8.38 करोड़ ही खर्च हुए हैं।

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छोटे जिले, लेकिन खर्च ज्यादा :

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जयपुर ग्रामीण जिले में जहां 31.98 करोड़ रुपए बीते साल हुए। जबकि इसके मुकाबले नागौर की आबादी कम है, बावजूद यहां 39.27 करोड़ रुपए खर्च नि:शुल्क दवा पर हुआ। इसी तरह भीलवाड़ा में 37.39 करोड़, चरू में 36.56 करोड़, दौसा में 34.22 करोड़ झुंझुनूं में 35.43 करोड़ रुपए नि:शुल्क दवा पर खर्च हो गए।

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रीजों के रैफरल होकर बड़े शहरों के अस्पतालों में आना, आरजीएचएस-मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना में प्राइवेट अस्पतालों में भी मरीजों को निशुल्क इलाज होना एक बड़ा कारण हैं कि कई जिलों में निशुल्क दवाईयों की खपत सरकारी अस्पतालों में कम हुई होगी। हालांकि विभाग सभी सरकारी अस्पतालों में सभी दवाईयों की उपलब्धता है।

 

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