जयपुर में भी लोहड़ी की तैयारियां जबरदस्त : गूंजेंगे-भंगड़ा, गिद्दा और लोकगीत ; नई शादी-पहली संतान वाले घरों में मनाते हैं धूमधाम से
नव विवाहितों और नवजातों के लिए खास
लोहड़ी का पर्व 13 जनवरी को पूरे उत्साह और उल्लास से मनाया जाएगा। लोहड़ी को सर्दियों के अंत, नई फसल के आगमन और किसानों की मेहनत के उत्सव के रूप में देखा जाता है। लोहड़ी सूर्य देव और अग्नि देव को समर्पित पर्व। दरअसल, भारतीय समाज में सूर्य और अग्नि को ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत माना गया।
जयपुर। लोहड़ी का पर्व 13 जनवरी को पूरे उत्साह और उल्लास से मनाया जाएगा। लोहड़ी को सर्दियों के अंत, नई फसल के आगमन और किसानों की मेहनत के उत्सव के रूप में देखा जाता है। लोहड़ी सूर्य देव और अग्नि देव को समर्पित पर्व है। दरअसल, भारतीय समाज में सूर्य और अग्नि को ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत माना गया है। यह त्योहार सर्द ऋतु के विदा होने और बसंत ऋतु के आगमन का संकेत भी देता है। लोहड़ी की रात को वर्ष की सबसे ठंडी रातों में से एक माना जाता है। इस अवसर पर पवित्र अग्नि में फसलों का अंश अर्पित किया जाता है। लोहड़ी का संबंध लोकनायक दुल्ला भट्टी से भी जुड़ा है, जिन्हें महिलाओं की रक्षा और निर्धनों की सहायता के लिए जाना जाता है।
क्या करते हैं लोहड़ी के दिन
लोहड़ी के दिन शाम के समय लोग एकत्रित होकर अलाव जलाते हैं और उसकी परिक्रमा करते हुए गेहूं की बालियां, रेवड़ी, मूंगफली, खील, गजक, चिक्की और गुड़ से बनी वस्तुएं अग्नि में अर्पित करते हैं। पंजाबी समुदाय इस पर्व को भांगड़ा, गिद्दा, लोकगीतों और ढोल की थाप के साथ बड़े हषार्ेल्लास से मनाता है।
नव विवाहितों और नवजातों के लिए खास
लोहड़ी के दिन प्रदोष काल में अग्नि प्रल्वलित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन सूर्यास्त का समय शाम 5.44 बजे रहेगा, अत: सूर्यास्त के बाद लगभग दो घंटे का समय लोहड़ी पूजन के लिए उत्तम रहेगा। विशेष रूप से जिन घरों में नई शादी हुई हो, पहली संतान का जन्म हुआ हो या पहली लोहड़ी होने पर यह पर्व धूमधाम से मनाया जाता है।

Comment List