करुर भगदड़ मामला: कड़ी सुरक्षा के बीच टीवीके प्रमुख विजय पहुंचे सीबीआई मुख्यालय, पूछताछ जारी
करूर भगदड़ मामले में अभिनेता विजय से सीबीआई की पूछताछ
करूर भगदड़ जांच में टीवीके प्रमुख अभिनेता विजय कड़ी सुरक्षा के बीच सीबीआई के सामने पेश हुए। एजेंसी रैली में सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण और लापरवाही की भूमिका की जांच कर रही है।
नई दिल्ली। तमिलनाडु के राजनीतिक दल तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) के प्रमुख और प्रसिद्ध तमिल अभिनेता विजय, कड़ी सुरक्षा के बीच सोमवार को 'करूर भगदड़' मामले में पूछताछ के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के समक्ष पेश हुए जहाँ जांच टीम ने उनसे पिछले साल हुई उस दुखद घटना के बारे में विस्तार से पूछताछ की। सीबीआई ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 179 के तहत नोटिस जारी कर अभिनेता विजय को जांच में शामिल होने के लिए राष्ट्रीय राजधानी बुलाया था। जांच एजेंसी इस बात की पड़ताल कर रही है कि रैली के दौरान सुरक्षा मानकों और भीड़ नियंत्रण के उपायों का पालन किया गया था अथवा नहीं।
उल्लेखनीय है कि, पिछले साल 27 सितंबर को तमिलनाडु के करूर में अभिनेता विजय की एक बड़ी राजनीतिक रैली के दौरान अचानक भगदड़ मच गई थी। इस हादसे में 41 लोगों की मौत हो गई थी और 60 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसकी जांच सीबीआई को सौंपी गई थी।
तमिलनाडु पुलिस ने दावा किया कि अभिनेता विजय के करूर रैली में देरी से पहुंचने की वजह से भगदड़ मची। बहुत ज्यादा देरी के कारण भीड़ बेकाबू हो गई। पुलिस ने भगदड़ की वजह भीड़, अपर्याप्त व्यवस्थाओं जैसे भोजन, पीने के पानी और सैनिटरी सुविधाओं की कमी को भी बताया। लेकिन अभिनेता विजय ने इन आरोपों का जोरदार खंडन करते हुए इन्हें राजनीति से प्रेरित बताया और सत्ताधारी द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) पर बदनामी का अभियान चलाने का आरोप लगाया।
अभिनेता विजय ने उल्टे पुलिस पर अव्यवस्था का आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस ने प्रवेश वाली जगहों पर भीड़ प्रबंधन में गंभीर गलतियाँ की, जिससे भगदड़ मची और लोगों की जान चली गयी। शुरुआत में, मद्रास उच्च न्यायालय ने त्रासदी से पहले की घटनाओं की जांच के लिए एक विशेष जांच दल का गठन किया था। बाद में उच्चतम न्यायालय ने इस मामले को अपने हाथ में ले लिया, और सीबीआई को एक सेवानिवृत्त उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली समिति की देखरेख में जांच करने का निर्देश दिया।
तमिलनाडु सरकार के पहले नियुक्त किए गए एकल-सदस्यीय जांच आयोग को भी शीर्ष अदालत ने पलट दिया, जिसने तय किया कि इस मामले में अधिक निष्पक्ष और विश्वसनीय जांच की आवश्यकता है। खास बात यह है कि विजय की पार्टी टीवीके ने भी इस घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की थी।

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