एक्शन में पुलिस : अपराध पर लगाम कसने की तैयारी, निकाले अलग-अलग आदेश; ठहरने, नौकर रखने और सैकण्ड हैण्ड वाहन विक्रेताओं को किया पाबंद
कमरा किराए पर दिया जाता हैं
मोबाइल नम्बर और नाम पते सुरक्षित रखने के लिए पाबंद किया गया है और किसी भी व्यक्ति के संदिग्ध होने की आशंका पर तुरंत पुलिस को सूचित करें।
जयपुर। जयपुर महानगर में होने वाले अपराधों पर लगाम कसने के लिए जयपुर पुलिस ने शुक्रवार को पांच अलग-अलग आदेश जारी किए हैं, जिनमें ठहरने, मोबाइल-सिम विक्रेता, पावर बाइक, घरेलू व ऑफिस में नौकर रखने और सैकण्ड हैण्ड वाहन विक्रेताओं के लिए महत्वपूर्ण आदेश निकाले हैं। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त अपराध डॉ. रामेश्वर सिंह ने बताया कि महानगर में व्यावसायिक कार्य के लिए चल रहे होटल, धर्मशालाओं, लॉजेज, सराय आदि में कमरा किराए पर दिया जाता हैं, जिसमें अपराधियों, आतंकवादियों, समाज विरोधियों और राष्ट्र विरोधियों के ठहरने की सम्भावनाएं रहती हैं। संचालकों क ो ठहरने वाले अधिकृ त व्यक्तियों के पहचान, मोबाइल नम्बर और नाम पते सुरक्षित रखने के लिए पाबंद किया गया है और किसी भी व्यक्ति के संदिग्ध होने की आशंका पर तुरंत पुलिस को सूचित करें।
मोबाइल सिम विक्रेताओं के लिए
अनाधिकृ त पहचान पत्रों, दस्तावेजों के आधार पर फर्जी तरीके से सिम या फोन कनेक्शन जारी नहीं करने होते हैं। वैध पहचान सुनिश्चित होने पर ही सिम या फोन कनेक्शन उपलब्ध कराएं। संदिग्ध होने की स्थिति में पुलिस को सूचित करें।
ध्यान भटकने से दुर्घटना की आशंका
मोटरसाइकिल गैराज के संचालकों के जरिए पावर बाइक, बुलैट और अन्य मोटरसाइकिलों में मोडिफाई साइलेंसर लगाए जाते हैं। जिससे सार्वजनिक स्थानों पर आमजन को परेशानी होती है और ध्यान भटकने से दुर्घटना की आशंका रहती है। साथ ही अवैध नम्बर प्लेट लगाने वाले गैराज संचालकों पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
होगी कड़ी कार्रवाई
सैकण्ड हैण्ड वाहन खरीदने-बेचने वाले डीलर, एजेंट ग्राहकों का नाम, पता, सम्पर्क और वाहन की आरसी का विवरण नहीं रखते हैं। ऐसे में अपराधी बड़ी आसानी से सैकण्ड हैण्ड वाहन खरीद कर आपराधिक घटनाओं क ो अंजाम देते हैं और अपराध करने के बाद वाहन बैच कर फरार हो जाते हैं। बिना नाम पते की खरीदने-बेचने के कारण पुलिस को अपराधियों तक पहुंचने में मशक्कत करनी पड़ती हैं। ग्राहकों के खरीद-बेचने का विवरण नहीं रखने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी। शहर के विभिन्न इलाकों में हो रही अपराध की घटनाओं में घरेलू और कार्यालय, दुकान, ढाबे पर काम करने वाले नौकरों की संलिप्तता पाई गई। आरोपित नौकरों के किसी प्रकार के पहचान के दस्तावेज और पुलिस सत्यापन के अभाव में अपराधी पुलिस की पकड़ से बच जाते हैं। अगर पहचान के दस्तावेज या पुलिस सत्यापन होता है तो आरोपियों को पकड़ने में समय भी कम लगता है। मालिकों की लापरवाही के चलते सत्यापन नहीं होने के कारण अपराध करके भाग जाते हैं। ऐसे लापरवाह मकान मालिकों के खिलाफ विधि अनुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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