वन्यजीव दिवस पर विशेष शेर का साक्षात्कार : असली बहादुर हम शेर नहीं, हमारी शेरनियां होती हैं!

शेर जी, इतना ज्यादा क्यों सोते हो 

वन्यजीव दिवस पर विशेष शेर का साक्षात्कार : असली बहादुर हम शेर नहीं, हमारी शेरनियां होती हैं!

शेरों की आदत पर कहा, शिकार-विकार मैडम लोग कर लाती है और मजबूरी में हम भोर या संध्या में तभी निकलते हैं, जब मौसम थोड़ा ठंडा और बेहतर हो। 

जयपुर। नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में पहुंचते हैं तो क्या देखते हैं कि शेर साहब सोए पड़े हैं। पूछा तो पता चला महाशय 16 से 20 घंटे सोते हैं। शेर इसलिए भी ज्यादा सोते हैं, क्योंकि वे भोजन खाते हैं, उसमें प्रोटीन बहुत होता है और इस प्रोटीन को अच्छे से पचाने के लिए नींद की बहुत जरूरत होती है। 
 
शेर जी, इतना ज्यादा क्यों सोते हो 
हम जैसे उससे पूछते हैं कि शेर महोदय आप इतना क्यों सोते हो? वह नींद में ही जैसे बोले, एनर्जी बचाता हूँ। गरमी बहुत लगती है तो पूरे दिन सोकर थोड़ा राहत पाने की कोशिश करता हूँ। शेरों की आदत पर कहा, शिकार-विकार मैडम लोग कर लाती है और मजबूरी में हम भोर या संध्या में तभी निकलते हैं, जब मौसम थोड़ा ठंडा और बेहतर हो। 
 
नींद के अनोखे अंदाज की वजह 
हम अक्सर गुट (प्राइड) में सोते हैं, जिससे हमें सुरक्षा मिलती है। हम छायादार स्थानों जैसे पेड़ के नीचे या झाड़ियों में आराम करना पसंद करते हैं। हम किसी भी मुद्रा में सो सकते हैं—पीठ के बल, फैले हुए, या गोल-गोल सिकुड़कर। आराम करते हुए भी हम हमेशा चौकस रहते हैं और खतरे को भांप सकते हैं।
 
शेर की नींद से जुड़े दिलचस्प तथ्यहम शेर हैं और कहीं भी सो सकते हैं
पेड़ों के नीचे, गहरी ऊंची घास, चट्टानों या सड़क के बीच-कहीं भी सो सकते हैं। बस हमें सुरक्षित महसूस होना चाहिए।
 
शेर के सोने की अजीबोगरीब मुद्राएं
हम बिल्लियों की तरह फैले हुए, गोल घुमावदार या यहा तक कि चारों पैर हवा में करके भी सो सकते हैं—पूरी तरह रिलैक्स।
 
हम गहरी नींद में भी सो सकते हैं
जब तक कोई खतरा न हो, हम तेज हवाओं, बारिश और अन्य जानवरों की आवाजों के बीच भी चैन की नींद सो सकते हैं।
 
मैडम कम और मैं ज्यादा सोता हूँ
हमारे लिए 20-20 घंटे तक सोना आम बात है। लेकिन मैडम जरा कम सोती हैं, क्योंकि शिकार अधिकतर वहीं करती हैं।
 
पावर नैप लेना पसंद करते हैं
शेर लंबे समय तक लगातार नहीं सोते, बल्कि दिन में कई बार छोटे-छोटे झपकी लेते हैं और समय-समय पर जागकर अपने आस-पास की निगरानी करते हैं।
 
बच्चों की तरह सोते हैं शावक 
शेर के नन्हे-मुन्ने वयस्कों से भी ज्यादा सोते हैं। वे अपनी मां या भाई-बहनों के साथ चिपककर सोते हैं, जिससे उन्हें सुरक्षा और गर्मी मिलती है।
 
गहरी नींद में भी तत्काल जग जाते हैं
गहरी नींद में भी यदि कोई खतरा हो या शिकार की गंध आए तो हम तुरंत जागकर सतर्क हो जाते हैं। 
 
जंभाई लेना सिर्फ नींद का संकेत नहीं
जंभाई लेना शक्ति प्रदर्शन, संचार और खुद को तैयार करने का संकेत भी हो सकता है।

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