एसएमएस मेडिकल कॉलेज में राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित, दवाओं के साथ मरीज की सुरक्षा भी जरूरी
साइड इफेक्ट की भी होनी चाहिए समय पर रिपोर्टिंग
जयपुर। 6वें राष्ट्रीय फार्माकोविजिलेंस सप्ताह-2026 के अवसर पर एसएमएस मेडिकल कॉलेज के ग्राउंड ऑडिटोरियम में चिकित्सा शिक्षा विभाग एवं एसएमएस मेडिकल कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में राज्य स्तरीय फार्माकोविजिलेंस संवेदनशीलता कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला का विषय फार्माकोविजिलेंस के माध्यम से दवाओं के तर्कसंगत उपयोग को बढ़ावा देना: सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में एक कदम रहा। कार्यशाला में प्रदेश के चिकित्सा महाविद्यालयों के चिकित्सक, चिकित्सा शिक्षक एवं संबंधित विशेषज्ञ शामिल हुए।
मरीज तक सिर्फ दवा पहुंचाना ही पर्याप्त नहीं : राठौड़
प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा शिक्षा गायत्री राठौड़ ने कहा कि अस्पतालों में मरीज तक दवा पहुंचाना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि यह भी जरूरी है कि दवा सुरक्षित हो और उसका सही तरीके से उपयोग किया जाए। अस्पतालों में इलाज के दौरान यदि किसी मरीज में दवा का प्रतिकूल प्रभाव दिखाई देता है, तो उसकी पहचान कर समय पर रिपोर्ट करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि दवाओं के प्रतिकूल प्रभाव की रिपोर्टिंग को लेकर चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ को किसी तरह का डर या संकोच नहीं होना चाहिए। ऐसी रिपोर्टिंग किसी डॉक्टर, रेजिडेंट या नर्स के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई का आधार नहीं होगी। उन्होंने मेडिकल कॉलेजों में दवाओं के साथ मेडिकल डिवाइस की सुरक्षा पर भी ध्यान देने की बात कही। किसी एक अस्पताल में की गई एडीआर रिपोर्ट भी पूरे प्रदेश के मरीजों की सुरक्षा में उपयोगी हो सकती है। यदि किसी विशेष बैच की दवा से असामान्य प्रतिक्रिया के कई मामले सामने आते हैंए तो इसकी जानकारी आरएमएससीएल तक पहुंचने पर संबंधित बैच की जांच और आवश्यक कार्रवाई की जा सकती है।

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