पत्थर बोले भावनाओं की भाषा : पेबल आर्ट प्रदर्शनी ने मोहा मन, दर्शक हो रहे आकर्षित
पहली नजर में यकीन करना मुश्किल
हवा महल एग्जीबिशन हॉल में 2 दिवसीय अनोखी पेबल आर्ट प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र बनी है। राजकुमार गुप्ता ने साधारण पत्थरों को भावनाओं और रंगों से जीवंत कलाकृतियों में ढाला है। 40 से अधिक आर्ट वर्क्स में मां-बेटे का स्नेह, प्रेम और मासूमियत की झलक दर्शकों को भावुक और मंत्रमुग्ध कर रही है।
जयपुर। हवा महल स्थित एग्जीबिशन हॉल में शुरू हुई 2 दिवसीय अनोखी प्रदर्शनी में कलाकार ने साधारण पत्थरों को रंगों और संवेदनाओं से सजाकर जीवंत कलाकृतियों में बदल दिया है। सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक खुली इस प्रदर्शनी में 40 से अधिक पेबल आर्ट वर्क्स दर्शकों को आकर्षित कर रहे हैं। विधिक पेशे से जुड़े राजकुमार गुप्ता पिछले कई वर्षों से पेबल आर्ट को अपनी अभिव्यक्ति का माध्यम बना चुके हैं। उनका मानना है कि हर पत्थर अपने भीतर एक अनकही कहानी और भावना समेटे होता है, बस उसे पहचानने और उकेरने की जरूरत होती है।
भावनाओं को रंगों में ढालती कला प्रदर्शनी में मां-बेटे के स्नेह, प्रेम और एक युवा की गहरी सोच जैसे विषयों को बेहद संवेदनशीलता से प्रस्तुत किया गया है। खास तौर पर बच्चे की मासूमियत दर्शाती कलाकृति दर्शकों को भावुक कर देती है। वहीं, प्रेम पर आधारित रचना पुरानी प्रेम कहानियों को ताजा कर देती है। दर्शकों को कर रही मंत्रमुग्ध इन कलाकृतियों की खासियत यह है कि पहली नजर में यकीन करना मुश्किल होता है कि ये सिर्फ पत्थर हैं।

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