सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की पंचायतों के परिसीमन को चुनौती देने वाली एसएलपी, हाईकोर्ट की खंडपीठ के आदेश में दखल से इनकार
याचिका को खारिज कर दिया
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान में पंचायत मुख्यालय परिवर्तन व परिसीमन अधिसूचनाओं को चुनौती देने वाली एसएलपी खारिज कर दी। सीजेआई सूर्यकांत की पीठ ने हाईकोर्ट आदेश में हस्तक्षेप से इनकार किया। राज्य सरकार ने कहा प्रक्रिया Rajasthan Panchayati Raj Act, 1994 के तहत हुई।
जयपुर। सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश में पंचायतों का मुख्यालय बदलने सहित 10 जनवरी 2025 की गाइडलाइनों का पालन नहीं करने और 20 नवम्बर 2025 व 28 दिसम्बर 2025 की संशोधित अधिसूचनाओं को चुनौती देने वाली विशेष अनुमति याचिका को खारिज कर दिया है। सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने यह आदेश जयसिंह की एसएलपी पर दिए। एसएलपी में राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ के गत 21 जनवरी के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें पंचायतों का मुख्यालय बदलने सहित परिसीमन की अधिसूचनाओं को चुनौती देने वाली याचिका अदालत ने खारिज कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट की खंडपीठ के आदेश में दखल से इनकार करते हुए कहा कि प्रदेश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में अदालत की ओर से हस्तक्षेप करने से परहेज करना चाहिए। पंचायत चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इस स्तर पर हाईकोर्ट के आदेश में दखल नहीं दे सकते।
एसएलपी में हाईकोर्ट के आदेश की चुनौती : एसएलपी में हाईकोर्ट की खंडपीठ के आदेश को चुनौती देते हुए कहा कि राज्य सरकार ने परिसीमन अधिसूचना जारी करते समय वैधानिक प्रावधानों का पालन नहीं किया। मुख्यालय की दूरी एवं निवासियों को होने वाली असुविधा के संबंध में दर्ज आपत्तियों का भी निस्तारण नहीं किया। ऐसे में ग्राम पंचायत का मुख्यालय बदलना मनमाना है।
सरकार की ओर से यह दिया गया जवाब :
इसके जवाब में राज्य सरकार के एएसजी केएम नटराज व एएजी शिवमंगल शर्मा ने कहा कि परिसीमन की पूरी प्रक्रिया राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 के अनुसार की गई है। राज्य सरकार ने इस दौरान आपत्तियों पर विचार कर उनका निस्तारण भी किया और मंत्रिस्तरीय उप-समिति ने पुनर्गठन को मंजूरी दी थी। हाईकोर्ट ने पूर्व में निर्देश दिया था कि पुनर्गठन की प्रक्रिया को 31 दिसंबर, 2025 तक की जाए। इसके पालन में ही 28 दिसंबर 2025 को नोटिफिकेशन जारी किया था। वहीं जनवरी, 2026 में सभी पंचायती राज संस्थाओं के वार्ड के गठन का काम पूरा किया। राज्य निर्वाचन आयोग ने भी मतदाता सूचियों के प्रारूप का प्रकाशन कर चुनाव प्रक्रिया शुरू कर दी है। अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 25 फरवरी को करना है और प्रदेश में 15 अप्रेल 2026 तक चुनाव प्रक्रिया पूरी करनी है। इसलिए एसएलपी खारिज की जाए। जिस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एसएलपी को खारिज कर दिया है।

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