स्वयंसिद्धा आश्रम योजना बनी बुजुर्गों और असहायों का सहारा : सरकार की योजना से बुजुर्गों को सम्मानजनक जीवन, 10 नए जिलों तक विस्तार
उद्देश्य जरूरतमंद लोगों को सुरक्षित और परिवार जैसा वातावरण उपलब्ध कराना है
राजस्थान की स्वयंसिद्धा आश्रम योजना बुजुर्गों और असहाय लोगों को सम्मानजनक जीवन दे रही। 17 जिलों में संचालित आश्रमों में आवास, भोजन और चिकित्सा सुविधाएं मिल रही। योजना का विस्तार 10 नए जिलों तक। पात्रों को 3250 रुपये मासिक भत्ता दिया जाता है।
जयपुर। राजस्थान सरकार द्वारा शुरू की गई स्वयंसिद्धा आश्रम योजना बुजुर्गों और असहाय लोगों के लिए सम्मानजनक जीवन का मजबूत सहारा बन रही है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य जरूरतमंद लोगों को सुरक्षित और परिवार जैसा वातावरण उपलब्ध कराना है। राज्य सरकार ने बजट 2024-25 में संभाग स्तर पर 50-50 क्षमता वाले आश्रम खोलने की घोषणा की थी। इसके बाद बजट 2025-26 में योजना का विस्तार 10 नए जिलों तक किया गया। वर्तमान में प्रदेश के 17 जिलों में स्वयंसेवी संस्थाओं के माध्यम से स्वयंसिद्धा आश्रम संचालित हो रहे हैं। इन आश्रमों में रहने वाले बुजुर्गों को आवास, भोजन, कपड़े, चिकित्सा सुविधा और मनोरंजन जैसी आवश्यक सुविधाएं दी जा रही हैं।
योजना के तहत पुरुषों के लिए 58 वर्ष और महिलाओं के लिए 55 वर्ष आयु निर्धारित की गई है। इसके अलावा निराश्रित और परिवार से प्रताड़ित लोग भी पात्र हैं। योजना के तहत प्रति व्यक्ति 3250 रुपये प्रतिमाह मैस भत्ता दिया जाता है। वर्तमान में 483 से अधिक बुजुर्ग और असहाय नागरिक इस योजना का लाभ ले रहे हैं। राज्य सरकार का कहना है कि यह योजना सामाजिक सुरक्षा और मानवीय संवेदनाओं को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम है।

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