आरयू के अम्बेडकर चेयर को खत्म करने का मामला लोकसभा में उठा : केन्द्र सरकार ने पुष्टि की-आरयू ने नवीनीकरण के लिए प्रस्ताव तक नहीं भेजा
दैनिक नवज्योति ने उठाया था मामला
राजस्थान विश्वविद्यालय में डॉ. भीमराव अम्बेडकर के नाम पर स्थापित 'अम्बेडकर चेयर' के समाप्त होने का मामला लोकसभा में उठा। आरयू में अम्बेडकर के नाम पर डॉ.अम्बेडकर पीठ केन्द्र सरकार ने समाप्त कर दी और दूसरा अम्बेडकर स्टडी सेंटर है। अम्बेडकर सेंटर की स्थापना वर्ष 2008 में हुई थी।
जयपुर। राजस्थान विश्वविद्यालय में डॉ. भीमराव अम्बेडकर के नाम पर स्थापित 'अम्बेडकर चेयर' के समाप्त होने का मामला मंगलवार को लोकसभा में उठा। केन्द्र सरकार ने 'अम्बेडकर चेयर' को खत्म करने की पुष्टि करते हुए कहा कि 'डॉ.अम्बेडकर फाउंडेशन और आरयू के बीच किया गया एमओयू वर्ष 2021 में समाप्त होने के बाद आरयू ने नवीनीकरण के लिए डीएएफ को प्रस्ताव तक नहीं भेजा।' सीकर के सांसद अमराराम के अतारांकित प्रश्न खण्ड 'ग' में पूछा गया कि डॉ.अम्बेडकर चेयर की मान्यता रद्द होने के बावजूद राजस्थान विश्वविद्यालय प्रशासन कई वर्षों तक चेयरमैन की नियुक्ति करता रहा, इसके क्या कारण हैं? केन्द्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले ने लिखित उत्तर में बताया कि-'डॉ.अम्बेडकर पीठ के लिए समझौता समाप्त होने के बाद आरयू प्रशासन यदि कोई नियुक्ति करता है तो उनका आंतरिक प्रशासनिक निर्णय है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय अम्बेडकर पीठ के तहत मान्यता नहीं दे रही है।' जब अमराराम ने खण्ड 'घ' में पूछा कि क्या सरकार ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई है? मंत्री अठावले ने बताया कि चूंकि अम्बेडकर पीठ कार्य ही नहीं कर रही है तो जांच कैसे करा सकते हैं।
अम्बेडकर के नाम पर दो संस्थान एक की मान्यता रद्द, सेंटर में शोध के नाम पर कुछ नहीं
आरयू में अम्बेडकर के नाम पर डॉ.अम्बेडकर पीठ केन्द्र सरकार ने समाप्त कर दी और दूसरा अम्बेडकर स्टडी सेंटर है। अम्बेडकर सेंटर की स्थापना वर्ष 2008 में हुई थी। आरयू के छात्र प्रतिनिधि मनीष मेघवंशी के 'सूचना के कानून' के तहत ली जानकारी के अनुसार-सेंटर की स्थापना से लेकर आज तक एक भी विद्यार्थी को पीएच.डी नहीं कराई गई, एम.फिल और सर्टिफिकेट कोर्स भी नहीं हुए। ज्ञातव्य है कि दैनिक नवज्योति ने 'अम्बेडकर पीठ खत्म,वीसी को खबर तक नहीं' शीर्षक से प्रकाशित समाचार में बताया था कि अम्बेडकर पीठ के खत्म होने की जानकारी न तो कुलगुरु को थी और न ही उनके हस्ताक्षरों से नियुक्त चेयरपर्सन को। जबकि केन्द्र सरकार नि्क्रिरयता के आधार पर इस पीठ को पहले ही निरस्त कर चुकी थी। जबकि कुलगुरु प्रो. अल्पना कटेजा ने मार्च, 2025 में डॉ. तरुण कुमार को अम्बेडकर पीठ का चेयरमैन नियुक्त कर दिया। यानी, जिस संस्था का अस्तित्व ही नहीं था, उस पर नियुक्ति कर दी गई।
डॉ.अम्बेडकर के नाम से आरयू में दो सेंटर हैं, लेकिन एक को केन्द्र सरकार ने राजस्थान विश्वविद्यालय की अनदेखी के चलते मान्यता निरस्त कर दी और दूसरा अम्बेडकर सटेंर में आज तक कोई शोध तक नहीं हुआ। मैंने लोकसभा में सवाल लगाया था, जिसका जवाब आ गया है। केन्द्र सरकार को पुन: पीठ शुरू करनी चाहिए।
-अमराराम, लोकसभा सदस्य,सीकरु
आरयू के अम्बेडकर सेंटर की दुर्दशा प्रशासन की नि्क्रिरयता को दर्शाती है। बाबा साहब के नाम से बने सेंटर में कोई शोध आज तक नहीं हुआ।'
-मनीष मेघवंशी, आरटीआई प्राप्तकर्ता एवं छात्र प्रतिनिधि,आरयू

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