मौत का जुगाड़... और ट्रैफिक पुलिस बेखबर! जयपुर की सड़कों पर दौड़ रही है हजारों अवैध बाइक-ट्रॉली, ओवरलोडिंग और बाहर निकलते सरिए हर पल बनते हैं जानलेवा
हादसों की बढ़ी आशंका
जयपुर। जयपुर की सड़कों पर हर दिन सैकड़ों अवैध रूप से मॉडिफाई किए गए बाइक और स्कूटर आधारित लोडिंग वाहन दौड़ रहे हैं। पुराने दोपहिया वाहनों को काट कर बनाई गई इन ट्रॉलियों में क्षमता से कई गुना अधिक सामान ढोया जाता है। मजेदार बात यह है कि कई वाहनों के पीछे कई फीट तक सरिए और लोहे के एंगल बाहर निकले रहते हैं, जो किसी भी समय बड़े सड़क हादसे की वजह बन सकते हैं। शहर में ऐसे हजारों जुगाड़ वाहन रोजाना बाजारों, औद्योगिक क्षेत्रों और मुख्य सड़कों पर सामान ढोते नजर आते हैं। इनमें अधिकांश के पास न तो वैध फिटनेस है, न लोडिंग वाहन के रूप में स्वीकृति और न ही सुरक्षा मानकों के अनुरूप आवश्यक उपकरण। कई वाहनों में रिफ्लेक्टर, इंडिकेटर और टेल लाइट तक नहीं लगी हैं। यदि ऐसा वाहन अचानक ब्रेक लगा दे, पलट जाए या पीछे निकले सरिए किसी बाइक सवार से टकरा जाएं तो बड़ा हादसा होना तय माना जा रहा है।
करीब 35 हजार में बनता है जुगाड़
शास्त्री नगर के रहने वाले बिहार मूल के निवासी भोलू ने बताया कि उसने पुराने स्कूटर को करीब 35 से 40 हजार रुपए खर्च कर लोडिंग वाहन में बदलवाया। अब वह कपड़ा गोदामों से बड़े पार्सल ढोता है और एक पार्सल पर करीब 300 रुपए तक कमा लेता है।
शहर में हजारों अवैध बाइक-ट्रॉली आखिर कैसे चल रही हैं?
क्या इनका कोई वैध रजिस्ट्रेशन, फिटनेस या परमिट है?
ट्रैफिक पुलिस ने इनके खिलाफ विशेष अभियान अब तक क्यों नहीं चलाया?
क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही कार्रवाई होगी?
नियम तोड़ने पर क्या हो सकती है कार्रवाई?
हर वक्त रहता है जोखिम
मानसरोवर निवासी रामअवतार का कहना है कि उनका वाहन जुगाड़ का जरूर है, लेकिन उसके ब्रेक सही हैं और पिछले आठ वर्षों में कोई हादसा नहीं हुआ। सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के संशोधित वाहन निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप नहीं होते और किसी भी समय दुर्घटना का कारण बन सकते हैं।

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