एसएमएस को ट्रॉमा से जोड़ने वाला अंडरपास खुद ट्रॉमा में : लिफ्टें बंद, सुरक्षा इंतजाम भी बदहाल

प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल में मरीजों की मुश्किलें बढ़ीं

एसएमएस को ट्रॉमा से जोड़ने वाला अंडरपास खुद ट्रॉमा में : लिफ्टें बंद, सुरक्षा इंतजाम भी बदहाल
प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी चिकित्सा संस्थान एसएमएस अस्पताल को ट्रॉमा सेंटर से जोड़ने के लिए बनाया अंडरपास मरीजों और उनके परिजनों की सुविधा के बजाय अब दुविधा बन गया। ये अंडरपास खुद बदहाल व्यवस्थाओं का शिकार हो गया है। यह पैदल मार्ग रखरखाव के अभाव में अव्यवस्थाओं का अड्डा बनता जा रहा।

जयपुर। प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी चिकित्सा संस्थान एसएमएस अस्पताल को ट्रॉमा सेंटर से जोड़ने के लिए बनाया अंडरपास मरीजों और उनके परिजनों की सुविधा के बजाय अब दुविधा बन गया है। ये अंडरपास खुद बदहाल व्यवस्थाओं का शिकार हो गया है। यह पैदल मार्ग रखरखाव के अभाव में अव्यवस्थाओं का अड्डा बनता जा रहा है। हालत यह है कि यहां मरीजों को बीमारी से ज्यादा रास्ते की परेशानियों से जूझना पड़ रहा है। हर दिन हजारों मरीज, बुजुर्ग, दिव्यांग और उनके परिजन इस मार्ग का उपयोग करते हैं लेकिन अंडरपास में प्रवेश करते ही सबसे पहले  दोपहिया वाहनों की कतारें दिखाई देती हैं। पैदल यात्रियों के लिए बनाया गया रास्ता धीरे-धीरे अंडरपास में संचालित दवा दुकानदारों की पार्किंग स्थल का रूप ले चुका है। 

दोनों लिफ्टें बंद, मरीज परेशान
अंडरपास की सबसे बड़ी समस्या यहां लगी दोनों लिफ्टों का बंद होना है। मरीजों की सुविधा के लिए स्थापित की  एक लिफ्ट करीब एक वर्ष से खराब पड़ी है, जबकि दूसरी पिछले चार माह से बंद है। ऐसे में बुजुगोंर्, दिव्यांगों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों को मजबूरी में सीढि़यों का उपयोग करना पड़ रहा है। ट्रॉमा सेंटर में भर्ती मरीजों के परिजनों का कहना है कि कई बार व्हीलचेयर को सीढि़यों से ऊपर-नीचे ले जाना पड़ता है, जिससे मरीज और सहयोगी दोनों परेशान होते हैं। 

रोजाना हजारों लोगों पर असर
एसएमएस अस्पताल और ट्रॉमा सेंटर के बीच यह अंडरपास सबसे महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। प्रतिदिन हजारों मरीज और परिजन इसका उपयोग करते हैं। यदि बंद लिफ्टों को चालू किया जाए, बेतरतीब खड़े दुपहिया वाहनों को हटाया जाए और सुरक्षा व स्वच्छता व्यवस्थाओं को दुरुस्त किया जाए तो बड़ी संख्या में लोगों को राहत मिल सकती है।

सुरक्षा व्यवस्था भी सवालों के घेरे में
सिर्फ  सुविधाएं ही नहीं सुरक्षा व्यवस्था भी यहां सवालों के घेरे में है। अंडरपास में लगाए अग्निशमन यंत्रों पर धूल की मोटी परत जमी हुई है। कई यंत्रों की स्थिति देखकर प्रतीत होता है कि लंबे समय से उनका निरीक्षण या रखरखाव नहीं किया है। अस्पताल जैसे संवेदनशील परिसर में सुरक्षा उपकरणों की यह हालत गंभीर चिंता का विषय है। यंत्रों पर रिफलिंग की अंतिम तिथि वर्ष 2024 अंकित है जो कि दर्शाता है कि वर्ष 2024 से अब तक इनका रख रखाव ही नहीं हुआ है। वहीं अंडरपास और आसपास के क्षेत्रों में गंदगी और जमा पानी भी नजर आता है। 

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मेरा अभी अभी जोन में स्थानांतरण हुआ है। इस संबंध में मुझे ज्यादा जानकारी नहीं है। 
-दीपक अग्रवाल, एक्सईएन, जोन-1 (ए) जेडीए। 

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